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सब्जियों ने बिगाड़ा किचन का बजट, प्याज, टमाटर थमे नहीं, मटर-गाजर के भी दाम बढ़े

Wed, 29 Nov 2017 04:11 PM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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सर्दी में सस्ती सब्जी की उम्मीदें संजोए रखने वालों को मायूस हाथ लग रही है। ठंडक बढऩे के बावजूद सब्जियों की गरमाहट ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। टमाटर की लाली कम नहीं हुई और प्याज के आंसू निकालने का सिलसिला जारी है। मटर और गाजर जैसी सब्जियां भी आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है।
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सब्जी के सप्लायर महंगी सब्जियों की वजह जहां मंडियों में इनकी कम आवक को मानते हैं, वहीं कृषि अर्थशास्त्री कहते हैं कि खेती के उत्पादों का कुप्रबधन इसके लिए जिम्मेदार हैं। मंडी कारोबारियों का मानना है कि निर्यात पर पाबंदी के बिना प्याज के दाम नीचे नहीं आएंगे। 

इस बार देश में प्याज का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है फिर भी पिछले चार माह से प्याज के दाम लगातार चढ़ रहे हैं। मई-जून में सड़कों पर प्याज फेंकने और किसानों के आंदोलन के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने 8 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज खरीदी थी। वहीं प्याज अब खुले बाजार में 50 से 80 रुपये किलो बिक रही है। मंडियों में इन दिनों नासिक का प्याज आ रहा है। 
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राजधानी लखनऊ को ही लें, तो आमतौर पर 8-10 ट्रक प्याज प्रतिदिन आती हैं लेकिन पिछले कुछ दिनोंं से दो से चार ट्रक प्याज ही आ रही है। सीतापुर रोड स्थित नवीन मंडी में प्याज के थोक व्यापारी रिंकू सोनकर कम आवक को प्याज की कीमत बढऩे की वजह बताते हैं। प्याज में तेजी का यह आलम लखनऊ और दिल्ली ही नहीं पूरे उत्तर भारत में हैं। 

नासिक से घटी प्याज की आवक

प्याज के सबसे बड़े उत्पादक नासिक (महाराष्ट्र) से 30 लाख टन से ज्यादा प्याज विदेशों को जा चुकी है। इसलिए वहां से प्याज की आवक घट गई है। दिल्ली में सब्जी के सप्लायर पुनीत मनचंदा कहते हैं कि आमतौर पर पिछले सालों में इन दिनों लाल प्याज के थोक भाव 20 से 30 रुपये किलो रहते थे लेकिन सोमवार को थोक भाव 56 रुपये किलो रहा।

रिटेल में 70-80 रुपये किलो प्याज बिकेगी ही। सब्जी के थोक विक्रेता शेर सिंह का कहना है कि जब तक प्याज का निर्यात नहीं रुकेगा तब भाव नीचे नहीं आएंगे। केंद्र सरकार ने न्यूनतम निर्यात रेट तय करके प्याज के दाम में कमी लाने की कोशिश की है लेकिन यह ज्यादा कारगर रहने की उम्मीद नहीं है। 

प्याज ही आंसू नहीं निकाल रहे टमाटर ने भी खाने का टेस्ट बिगाड़ रखा है। फुटकर बाजार में टमाटर के भाव 60 से 80 रुपये प्रति किलो तक हैं। मनचंदा बताते हैं कि इन दिनों नासिक, पंजाब के बाद छत्तीसगढ़ से टमाटर आने लगता है लेकिन उसकी काफी आवक कम है।

टमाटर पर मौसम की मार भी पड़ी है। मटर भी खूब अकड़ दिखा रही है। खुले बाजार में सोमवार को मटर 70-80 रुपये प्रति किलो बिकी। गाजर का भाव पिछले कुछ दिनों से 50 से 60 रुपये किलो चल रहा था। पिछले दो दिनों से गाजर की आवक में सुधार होने से फुटकर रेट 30 से 50 रुपये किलो के बीच हैं। 

देखें, इन कारणों से आसमान छू रहीं सब्जियां

इन कारणों से आसमान छू रहीं सब्जियां
- महाराष्ट्र से प्याज का निर्यात पिछले साल के मुकाबले ढाई गुना हुआ। 
- मध्य प्रदेश सरकार ने 8 रुपये किलो की दर से प्याज की खरीद की। 
- कर्नाटक में उत्पादन में कमी, गुजरात में ज्यादा बारिश से नुकसान। 
- टमाटर के उत्पादन में गिरावट, मंडियों में आवक कम होना। 
- मटर व गाजर की बाहरी आवक घटना, स्थानीय उत्पादन में कमी। 

कृषि अर्थशास्त्री प्रो. एपी तिवारी कहते हैं कि मांग के अनुरूप सब्जियों की आवक न होने से प्याज, टमाटर, मटर व गाजर जैसी सब्जियों के रेट चढ़े हुए हैं। हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था में ऐसे उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इसकी वजह कृषि उत्पादों का प्रबंधन ठीक नहीं होना है।
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लखनऊ में लगाए जा रहे काउंटर

ज्यादा उत्पादन के बाद भी जरूरी नहीं कि उपभोक्ता को सस्ती सब्जी मिले। प्याज के साथ यही हुआ है। फसल का ज्यादा उत्पादन हो जाए तो किसान मंडी में रोता है और कम उत्पादन होने पर खेत की मेड़ पर रोता है। इस स्थिति को बदलना होगा।

किसानों को सही भाव न मिलने से सब्जियों की खेती का रकबा कम होता जा रहा है। किसानों को फसलों का न्यूनतम भाव मिलना सुनिश्चित कराया जाना चाहिए। अन्यथा उपभोक्ता सब्जियों के दामों में उतार-चढ़ाव का सामना करते रहेंगे। 

वहीं लखनऊ में सस्ता प्याज और टमाटर के लिए सरकार की ओर से 14 जगह काउंटर लगाए जा रहे हैं। मंगलवार को इन काउंटर पर प्याज और टमाटर 35 रुपये प्रति किलो बिका। ये काउंटर शहर की सभी मंडी परिषद और उद्यान विभाग के कार्यालयों में लगाए जा रहे हैं। इनके अलावा जनेश्वर मिश्र पार्क के पस शहर की बड़ी सब्जी मंडियों में भी काउंटर्स से प्याज और टमाटर बेचने की व्यवस्था की गई है। 
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