काशी को सिर्फ केंद्र सरकार के कामकाज का ही नहीं बल्कि संगठनात्मक गतिविधियों का भी मॉडल बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
इसकी शुरुआत अमित शाह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के फैसले पर राष्ट्रीय परिषद की मुहर लगने के बाद शुरू हो जाएगी।
शाह की अध्यक्षी का अनुमोदन कराने के लिए अगस्त के दूसरे सप्ताह संगठन की राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाने की तैयारी है।
बैठक की तारीख अभी अंतिम रूप से तय नहीं पर, ज्यादा संभावना है कि बैठक 9 अगस्त को दिल्ली में होगी। राष्ट्रीय परिषद से अनुमोदन के बाद शाह का ‘मिशन यूपी’ शुरू हो जाएगा।
संघ और पार्टी दोनों का यही मकसद
अमित शाह का 16-17 अगस्त को काशी दौरा संभावित है। उसी में सरकार व संगठन के काम का काशी को मॉडल बनाने की कार्ययोजना पर अब तक हुए कामकाज की समीक्षा करेंगे।
इस सिलसिले में प्रारंभिक काम अंतिम रूप में है। जानकारी के मुताबिक, मोदी के संसदीय क्षेत्र के कार्यालय की तलाश का काम पूरा हो गया है अब अन्य औपचारिक काम निपटाए जा रहे हैं। शाह वाराणसी दौरे में कामों को देखेंगे। जहां कहीं सुधार की जरूरत होगी, उसे ठीक कराएंगे।
काशी के मॉडल से देंगे संदेश
दरअसल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि काशी को केंद्र सरकार के कामकाज से लेकर संगठनात्मक गतिविधियों तथा जनता के सरोकारों से जुड़ाव का मॉडल बनाया जाए।
जिससे लोगों को संदेश मिले कि पार्टी सत्ता में आने के बाद हाथ पर हाथ रखकर बैठने वाली नहीं है। वह लोगों की समस्याओं के समाधान में सहायक बनकर काम करना चाहती है।
तैनात होंगे पूर्णकालिक कार्यकर्ता व प्रचारक
आम लोगों से संपर्क व संवाद तथा जनप्रतिनिधियों के कामकाज पर नजर रखने को रणनीतिकारों ने सांसदों को सभी स्थानों पर कार्यालय खोलने को भी कहा है।
यह कार्यालय सांसदों व आम लोगों के बीच समन्वय व संवाद के आदान-प्रदान का काम करेंगे। इन कार्यालयों की जिम्मेदारी संघ परिवार के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं व प्रचारकों को सौंपी जाएगी।
इसकी शुरुआत भी मोदी के निर्वाचन क्षेत्र काशी से हो रही है। योजना के अनुसार, प्रचारक क्षेत्रीय समस्याओं व जनता की अपेक्षाओं की सूचना रखने के साथ उसका समाधान भी तलाशेंगे।
वरिष्ठ कार्यकर्ता स्थानीय जनता और सांसद के बीच समन्वय का काम देखेंगे।
नजरें पूर्वांचल के चुनावी गणित पर
हाल में ही निपटे लोकसभा चुनाव के नतीजों को छोड़ दें तो अतीत में पूर्वांचल में भाजपा का चुनावी प्रदर्शन पश्चिम की अपेक्षा कुछ कमजोर रहता है। इसीलिए भगवा टोली के रणनीतिकार काशी के जरिये पूर्वांचल के चुनावी गणित को दुरुस्त कर लेना चाहते हैं।
इनका मानना है कि जिस तरह लोकसभा की पूर्वांचल में स्थित 36 सीटों में आजमगढ़ को छोड़कर शेष सभी पर भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल के उम्मीदवार जीते हैं।
उसके चलते इस इलाके में लोगों से संपर्क और संवाद बढ़ाकर विधानसभा चुनाव में जीत की संभावनाओं को काफी मजबूत किया जा सकता है।
जिससे इस इलाके में स्थित विधानसभा की लगभग 150 से ज्यादा सीटों पर पार्टी की पकड़ व पहुंच को बढ़ाया जा सकता है।