संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि पहले चरण में करीब 70 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। प्रदेश सरकार ने प्रोजेक्ट को स्वीकार कर लिया है। इसका पूरे देश को फायदा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि एनिमल हाउस बिल्डिंग के ऊपर लैब बनाने की तैयारी है। यहां संक्रामक बीमारियों से जुड़ी वैक्सीन बनाने का काम होगा। इसी तरह एसजीपीजीआई में संक्रामक बीमारियों की चपेट में आने वाले मरीजों के लिए अलग से आईसीयू बनेगा। यहां मरीजों को भर्ती कर उनकी बीमारी चिह्नित की जाएगी और संबंधित बीमारी के लिए कारगर दवाएं व वैक्सीन तैयार की जाएगी।
- नई संक्रामक बीमारी की रोकथाम के लिए नहीं करना पड़ेगा इंतजार।
- पहले मौजूद संक्रामक बीमारियों की प्रकृति में होने वाला परिवर्तन जान सकेंगे।
- बीमारियों की पहचान कर इलाज की नई तकनीक व दवाएं विकसित की जाएंगी।
- संक्रामक रोग के नियंत्रण की नीति तैयार करने में मददगार बनेगा सेंटर।
- संक्रामक रोग नियंत्रण में डीएम कोर्स शुरू होगा, देश को प्रशिक्षित चिकित्सक मिलेंगे।
- एडवांस तकनीक होने से बीमारियों को समय रहते पहचाना जा सकेगा।
- संक्रामक रोग का अस्पताल खुलने से मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू होगा।
- संस्थान में लैब होने से वायरस या बैक्टीरिया को तत्काल चिह्नित कर इलाज शुरू होगा, इससे मृत्युदर घटेगी।
सूत्र बताते हैं कि देश की नामचीन वायरोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कंग ने भी सेंटर को विकसित करने में सहयोग का भरोसा दिया है। वहीं कई विश्वस्तरीय वायरोलॉजिस्ट भी एसजीपीजीआई को सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
निदेशक ने बताया कि देश दुनिया में फैले विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश में इस एक्सीलेंस सेंटर के विकसित होने से आसपास के राज्यों को भी फायदा मिलेगा। कई लोगों ने सेंटर को विकसित करने में सहयोग देने का आश्वासन दिया है।