हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद प्रदेश सरकार विभागों में निशक्तजनों के खाली पड़े पद भरने में नाकाम रही है।
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को बैकलॉग भर्ती के लिए छह महीने का समय दिया था, लेकिन एक साल से अधिक बीत जाने के बाद भी सरकार भर्ती नहीं कर सकी।
सरकारी नौकरियों में निशक्तजनों को तीन फीसदी आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन यूपी में निशक्तजनों को सरकारी नौकरी में आरक्षण ही नहीं दिया गया। इस पर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी।
हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2013 को प्रदेश सरकार को छह महीने में निशक्तजनों के बैकलॉग पद भरने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद सरकार हरकत में आई और विभागों को अपने यहां निशक्तजनों के बैकलॉग पद भरने को कहा।
सरकार ने पहले तीन सितंबर 2013 को विभिन्न विभागों के 455 खाली पदों की सूची उप्र. लोक सेवा आयोग को भेजी थी।
इसके पांच महीने बाद 28 जनवरी 2014 को 452 पदों की सूची लोक सेवा आयोग को भेजी गई।
इस बीच मामले की समीक्षा कर रहे विकलांगजन विकास विभाग ने पाया कि लोक सेवा आयोग अभी तक मात्र 28 पदों पर ही भर्ती कर सका है। अब भी 424 पद भरे जाने बाकी हैं।