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ITI: एक सीट पर 12 दावेदार, फिर भी सीटें खाली

Wed, 08 Oct 2014 02:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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हर साल की तरह इस साल भी आईटीआई में दाखिला लेने के बाद करीब 30 प्रतिशत अभ्यर्थी फीस जमा करने के बाद से गायब चल रहे हैं। राजकीय आईटीआई में इस समय 61,069 सीटें हैं।
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साढ़े सात लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इस हिसाब से हर सीट के लिए 12-12 अभ्यर्थियों के बीच जोर आजमाइश होनी थी।

आईटीआई में हॉस्टल व्यवस्था न होने के कारण अन्य जिलों में एडमिशन होने के बावजूद स्टूडेंट्स वहां नहीं रुकते हैं। ऐसे में सीटें खाली रहती हैं।

इस साल तीन स्तरीय आरक्षण व्यवस्था की शुरुआत की गई, जिसके तहत 25 प्रतिशत सीटें विकासखंड स्तर के, 25 प्रतिशत सीटें तहसील और 25 सीटें जनपद स्तर के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित कर दी गईं।

सोचा गया था कि इस तरह से अभ्यर्थियों के ड्रॉप आउट रेट में सुधार होगा पर ऐसा नहीं हुआ। ज्यादातर विकासखंडों में आईटीआई ही नहीं हैं।

इस वजह से पहले चरण की आरक्षण व्यवस्था पहले ही ध्वस्त हो गई। यही हालत तहसील का भी है। केवल जनपद स्तर पर ही काम हुआ। राजकीय आईटीआई अलीगंज की 860 में से 42 सीटों पर दाखिले ही नहीं हो पाए हैं।
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दूसरी ओर पहली काउंसलिंग से दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों में से 30 प्रतिशत बराबर गैरहाजिर रह रहे हैं। ये सीटें भी खाली रहने की आशंका है। यह बात सही है कि बीते साल की तरह इस साल भी आईटीआई में सीटें खाली बच गई हैं।

हर ब्लॉक में आईटीआई न होने के कारण आरक्षण व्यवस्था का लाभ नहीं मिल पाया है। 30%स्टूडेंट्स दाखिले के बाद से ही नहीं आ रहे हैं।

राजकीय आईटीआई के प्रिंसिपल राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि 10 दिनों तक उपस्थित न होने की सूरत में नाम काटने का प्रावधान है। अनुपस्थित रहने वालों के नाम काटने के बाद भी सीटें खाली हो जाएंगी।
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