फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैबिनेट के फैसले: दरोगा-इंस्पेक्टर भर्ती व मानदेय बढ़ाने पर हुआ निर्णय

Fri, 23 Dec 2016 11:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
कैबिनेट ने गुरुवार को यूपी पुलिस के दरोगा व इंस्पेक्टरों के एक तिहाई पदों को विभागीय परीक्षा से भरने का निर्णय लिया। इसके लिए कैबिनेट ने उप्र. उपनिरीक्षक और निरीक्षक सेवा नियमावली में दूसरे संशोधन को हरी झंडी दे दी है।
विज्ञापन


अभी पुलिस में इंस्पेक्टरों के सभी पद वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन से भरे जाते हैं। इनमें दरोगाओं को ही प्रमोशन दिया जाता है। लेकिन अब सरकार ने दो तिहाई पद ही वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन से भरने का निर्णय लिया है। अब एक तिहाई पदों पर प्रमोशन विभागीय परीक्षा के आधार पर दिया जाएगा।

इस परीक्षा में दरोगा ही बैठेंगे। इसका फायदा हाल ही भर्ती होकर आए नई उम्र के दरोगाओं को मिलेगा। अगर वे परीक्षा पास कर लेंगे तो उन्हें तत्काल इंस्पेक्टर पद पर प्रमोट कर दिया जाएगा। इसी तरह सब इंस्पेक्टर के 50 फीसदी पद सीधी भर्ती और 50 फीसदी पद वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन के जरिए भरने का नियम है।
विज्ञापन


इस पद पर हेड कांस्टेबल का वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन होता है। लेकिन नई व्यवस्था में वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन के पदों को घटाकर दो तिहाई करने का निर्णय लिया गया है। इसमें एक तिहाई पदों पर प्रमोशन विभागीय परीक्षा से किया जाएगा। इस परीक्षा में नई भर्ती वाले सिपाही शामिल हो सकेंगे।

इंस्पेक्टरों के 1666 पदों के लिए होगी परीक्षा

सूबे में इंस्पेक्टरों के पांच हजार पद हैं। इनमें से 3334 पद अब वरिष्ठता के आधार पर भरे जाएंगे। जबकि 1666 पदों पर प्रमोशन के लिए सरकार विभागीय परीक्षा कराएगी। इसमें हाल ही जॉइन करने वाले दरोगा भी शामिल हो सकेंगे।

विभागीय परीक्षा से भरे जाएंगे दरोगा के 6666 पद
प्रदेश में सब इंस्पेक्टर के 40 हजार पद हैं। इनमें से 20 हजार पद सीधी भर्ती के लिए हैं। शेष 20 हजार पदों में 13334 पद अब वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन के जरिए भरे जाएंगे। जबकि 6666 पदों के लिए विभागीय परीक्षा कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना को कैबिनेट की मंजूरी

सरकार ने होमगार्ड, आशा वर्कर, श्रमिक व फीरोजाबाद में कांच की चूड़ी बनाने वाले कारीगरों को निशुल्क इलाज की सुविधा देने जा रही है।

सरकार इन्हें भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) के दायरे में ला रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी। इस योजना के तहत लाभार्थी खुद व परिवार के पांच सदस्य अस्पतालों में 30 हजार रुपये तक का निशुल्क इलाज करा सकेंगे।

इस स्वास्थ्य बीमे में आने वाला प्रीमियम प्रदेश सरकार खुद वहन करेगी। जबकि श्रमिक सन्निर्माझा कर्मकार बोर्ड में पंजीकृत मजदूरों का भी सरकार आरएसबीवाई के तहत बीमा कराएगी। इसका प्रीमियम बोर्ड देगा।

अभी तक इस बीमा योजना के दायरे में केवल बीपीएल परिवार ही आते हैं। चुनाव को देखते हुए अखिलेश यादव सरकार ने इसका दायरा बढ़ा दिया है। इसमें कई सारे लोगों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। सरकार की इस योजना के तहत 36 लाख परिवारों को लाभ मिलेगा।

कितनों को मिलेगा लाभ

होमगार्ड--1.50 लाख
आशा--3.50 लाख
कांच की चूड़ी कारीगर--1.50 लाख
बोर्ड के पंजीकृत श्रमिक--30 लाख

वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना को भी मंजूरी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाभार्थियों के परिवारों के 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग अब 30 हजार रुपये तक का निशुक्ल इलाज करा सकेंगे। यह राशि परिवारों को मिलने वाले 30 हजार रुपये के इलाज से अतिरिक्त होगी। कैबिनेट ने वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना को मंजूरी दे दी।

दरअसल, आरएसबीवाई में गरीब परिवारों को 30 हजार रुपये तक का इलाज प्राइवेट अस्पतालों में फ्री होता है। अब सरकार इन परिवारों में 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को अलग से 30 हजार रुपये के फ्री इलाज की सुविधा देने जा रही है। यदि परिवार में 60 वर्ष से अधिक के दो बुजुर्ग हैं तो सरकार उन दोनों को 30-30 हजार रुपये के इलाज की सुविधा देगी।

ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत अध्यक्षों का मानदेय 40 फीसदी बढ़ा

प्रदेश कैबिनेट ने ग्राम प्रधानों के बाद ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। इनके मानदेय में 40 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इससे सरकार पर 3.11 करोड़ रुपये वार्षिक अतिरिक्त खर्च आएगा।

प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों ग्राम प्रधानों के आंदोलन के बाद उनका मानदेय 40 फीसदी बढ़ाया था। इसके बाद ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों ने सरकार से अपना मानदेय बढ़ाने की मांग की थी।

पंचायतीराज विभाग ने इनका मानदेय भी बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा था, जिसे गुरुवार को मंजूरी मिल गई। अब ब्लॉक प्रमुखों का मानदेय 7,000 रुपये से बढ़कर 9,800 रुपये हो जाएगा।

जिला पंचायत अध्यक्ष 10 हजार की जगह 14 हजार रुपये पाएंगे। ब्लॉक प्रमुखों का मानदेय बढ़ाने से सरकार पर 2.75 करोड़ और जिला पंचायत अध्यक्षों को बढ़ा मानदेय देने पर 36 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च आएगा।

राज्य कर्मचारियों के कैशलेस इलाज की मांग पूरी

अखिलेश यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को कैबिनेट ने राज्य कर्मचारियों की कैशलेस इलाज की मांग पूरी कर दी है। स्वास्थ्य विभाग के इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। इसके तहत राज्य कर्मचारियों व पेंशनरों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की वर्तमान व्यवस्था के साथ ही कैशलेस इलाज की भी सुविधा मिलेगी।

इसके तहत एसजीपीजीआई लखनऊ, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ एवं ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई, इटावा जैसे अन्य राजकीय पोषित संस्थानों में इलाज कराने पर केवल पांच फीसदी ही भुगतान देना होगा। इसके लिए चिकित्सा अधीक्षकों से बिल सत्यापित कराना होगा। इसके बिलों का 95 प्रतिशत राशि राज्य सरकार खुद वहन करेगी।

सरकार के इस फैसले से करीब साढ़े आठ लाख राज्य कर्मचारियों के अलावा 11 लाख पेंशनर्स  को लाभ मिलेगा। यदि लाभार्थी पांच फीसदी भुगतान देने के लिए सहमत नहीं होते हैं तो पहले से चली आ रही व्यवस्था के तहत चिकित्सा प्रतिपूर्ति ली जा सकेगी। असाध्य एवं अप्रत्याशित रोग के उपचार के लिए सीजीएचएस की तर्ज पर राज्य सरकार द्वारा अनुबंधित निजी चिकित्सालयों में मिलेगी।

सरकार सभी बड़े प्राइवेट अस्पताल से इसके लिए अनुबंध भी करेगी। दिल्ली एवं एनसीआर में स्थित अस्पतालों सहित अनुबंध वाले अस्पतालों में इजाज कराने के लिए इस्टीमेट का 95 फीसदी पैसा एक सप्ताह के अंदर संबंधित राज्य कर्मचारी एवं पेंशनर के बचत खाते में उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके बाद अग्रिम मिले पैसों का समायोजन तीन महीने में करना होगा।
विज्ञापन

प्रधानमंत्री आवास योजना की डीपीआर के लिए अतिरिक्त धन देगी राज्य सरकार

आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मकान मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत डीपीआर तैयार करने और योजना क्रियान्वयन पर नजर रखने के लिए गठित होने वाली ‘प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कंसल्टेंसी’ (पीएमसी) के लिए अतिरिक्त धन देने को राज्य सरकार तैयार हो गई है। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी मिल गई है।

राज्य सरकार के स्तर से योजना के तहत बनने वाले प्रति मकान 10625 रुपये अतिरिक्त राशि दी जाएगी। दरअसल इस योजना को तो केन्द्र सरकार ने लागू किया था, लेकिन इसके क्रियान्वयन पर आने वाले खर्च में राज्य सरकारों को भी हिस्सेदार बनाया गया है।

योजना के एक घटक में लाभार्थियों को खुद मकान बनाने पर केंद्र द्वारा प्रति मकान 1.5 लाख व राज्य सरकार द्वारा 1 लाख रुपये अनुदान देने की व्यवस्था है। लेकिन इस घटक के तहत बनाए जाने वाले मकानों का डीपीआर और सुपरविजन करने के लिए अलग से किसी तरह के धन की व्यवस्था नहीं है।

हालांकि राज्य सरकार ने केंद्र से इसके लिए अलग से राशि देने की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने मना कर दिया था। इस वजह से इस योजना के क्रियान्वयन में दिक्कत आ रही थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें