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योगी कैबिनेट ने 170 मोबाइल यूनिट खोलने को दी मंजूरी, रोजाना 10 हजार रोगियों को मिलेगा इलाज

Wed, 28 Mar 2018 12:16 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश में 170 नेशनल मेडिकल मोबाइल यूनिट (एनएमएमयू) के संचालन को कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी। प्रदेश के जेई-एईएस प्रभावित जनपदों में इसका प्राथमिकता से संचालन होगा। कुल 41 जिलों में पीपीपी मोड पर एनएमएमयू का संचालन होगा। परियोजना में आने वाला खर्च नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) देगा।

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शासन के प्रवक्ता के अनुसार परियोजना की मेडिकल मोबाइल यूनिट वाहनों, उपकरणों की खरीद, मानव संसाधन की उपलब्धता और संचालन निजी सेवा प्रदाता करेंगे। योजना सात साल की होगी। एक यूनिट में वाहन, ड्राइवर, डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स, लैब टेकभनीशियन की व्यवस्था करनी होगी।

इसके माध्यम से प्राथमिक उपचार, संचारी व गैरसंचारी, बीमारियों की स्क्रीनिंग, बेसिक लैब टेस्ट की सेवाएं दी जाएंगी। प्रति एमएमयू मासिक संचालन शुल्क प्रस्तावित किया गया है। एनएचएम निदेशक पंकज कुमार ने बताया कि इस सेवा के तहत एंबुलेंस दूरस्त ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराएगी। जिससे रोजाना 10 हजार से अधिक रोगियों का इलाज किए जाने की योजना है।

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जेई व एईएस प्रभावित 10 जिलों में सुधरेगी पेयजलापूर्ति व्यवस्था

- फोटो : अमर उजाला
जापानी इंसेफ्लाईटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफ्लाईटिस सिंड्रोम (एईएस) से प्रभावित 10 जिलों की 17 नगर निकायों में पेयजलापूर्ति व्यवस्था को सुधारा जाएगा। इसके लिए लखनऊ नगर निगम के पीएलए खाते में पड़े 23.76 करोड़ 78 हजार रुपये दिया जाएगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है।

इस धनराशि से सभी 10 जिलों की 17 नगर निकायों की मलिन बस्तियों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की परियोजना पूरी कराई जाएगी। जिन जिलों में काम कराया जाना है, उनमें आजमगढ़, बहराइच, बलरामपुर, बस्ती, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महाराजगंज, संत कबीर नगर और सिद्धार्थनगर शामिल हैं।

गाजियाबाद में फारेंसिक लैब के लिए 60 करोड़ रुपये का अनुमोदन
कैबिनेट ने गाजियाबाद में बन रहे क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला के भवन के पुनरीक्षित निर्माण के लिए 60 करोड़ रुपये कैबिनेट ने अनुमोदित कर दिया है। कैबिनेट ने ग्रेनाइड से कम लागत में रेड सैंड स्टोन, एल्युमुनियम टफेन ग्लास, एसीपी पैनलिंग और फाल सीलिंग के लिए निर्धारित विशिष्टियों से उच्च है, के प्रयोग पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी। इस निर्णय से इसी वित्तीय वर्ष में यह पैसे खर्च किए जा सकेंगे।

बुंदेलखंड के प्रत्येक ब्लॉक में बनेगा पशु आश्रय स्थल

- फोटो : amar ujala
छुट्टा पशुओं की समस्या से मिलेगी निजात, सरकार देगी 10 करोड़
बुंदेलखंड में छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रत्येक ब्लॉक में एक पशु आश्रय स्थल बनाने का फैसला किया है। इसके लिए पुनर्विनियोजन के माध्यम से 10 करोड़ रुपये मुहैया कराने के प्रस्ताव पर मंगलवार को कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी। इन आश्रय स्थलों का निर्माण जिलाधिकारियों के माध्यम से कराया जाएगा।

प्रत्येक विकास खंड के एक-एक न्याय पंचायत में इनका निर्माण कराया जाएगा। एक पशु आश्रय स्थल के निर्माण पर दी गई इस राशि में से अधिकतम 30 लाख रुपये खर्च किए जा सकेंगे। अतिरिक्त राशि की व्यवस्था मनरेगा, ग्राम पंचायत की संचित निधि, वित्त आयोग, खनिज विकास निधि, रायफल फंड, जिला पंचायत निधि, क्षेत्र पंचायत निधि, सांसद व विधायक क्षेत्र विकास निधि से की जाएगी।

सारनाथ का बुद्धा थीम पार्क ऑडिटोरियम बनेगा अत्याधुनिक
सारनाथ स्थित बुद्धा थीम पार्क के ऑडिटोरियम को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त किया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में ऑडिटोरियम को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों के लिए उपयोगी बनाने की मंजूरी दी गई। बुद्धाथीम पार्क के ऑडिटोरियम में फर्नीचर, फर्निंशिंग और साज सज्जा कार्य कराए जाएंगे। ऑडिटोरियम के कार्यों की गुणवत्ता पर निगरानी के लिए वाराणसी के मंडलायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है।

रामगढ़ ताल में होगा वाटर स्पोर्ट्स

- फोटो : amar ujala
गोरखपुर स्थित रामगढ़ ताल में वाटर स्पोर्र्ट्स काम्पलेक्स बनाया जाएगा और मनोरंजन गतिविधियां भी होगी। मंगलवार  को योगी कैबिनेट की बैठक में रामगढ़ ताल में वाटर स्पोर्ट्स काम्पलेक्स बनाने और मनोरंजन गतिविधियों के लिए 40.12 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई।

रामगढ़ ताल में फाल्स सीलिंग और स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग कार्य कराए जाएंगे। वाटर स्पोर्ट्स के लिए आवश्यक विशिष्ट उपकरणों की आवश्यकता और लागत निर्धारित करने के लिए प्रमुख सचिव पर्यटन की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। वाटर स्पोर्ट्स और झील मनोरंजन की गतिविधियों का संचालन करने के लिए गोरखपुर के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी।

आठ पिछड़े जिलों में सृजित सभी पद भरेंगे
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट ने केंद्र सरकार की ओर से पिछड़े जिलों में चिह्नित प्रदेश के सभी आठ जिलों के समस्त विभागों में सृजित समस्त पदों पर तैनाती को मंजूरी दे दी है। इनमें बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर व सिद्धार्थनगर शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन जिलों को महत्वाकांक्षी जिला योजना कार्यक्रम में चिह्नित किया है। यहां विकास से जुड़े तमाम कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। प्रधानमंत्री की अपेक्षा पर इन जिलों में युवा जिलाधिकारियों की तैनाती भी की गई है।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर नमकीन व मीठी दलिया व लड्डू वितरण को मंजूरी

- फोटो : amar ujala
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर महिलाओं व बच्चों को नए मेन्यू के मुताबिक पोषाहार वितरण को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं व किशोरियों को मीठी व नमकीन दलिया, लड्डू समेत नये मेन्यू में शामिल कई तरह के पोषाहार दिए जाएंगे।

दरअसल सरकार ने पोषाहार वितरण में पिछले कई साल से चले आ रहे एक खास सिंडिकेट का वर्चस्व खत्म करने के लिए निविदा प्रक्रिया और पोषाहार मेन्यू में कई तरह के बदलाव किए थे। नई प्रक्रिया के तहत ही पिछले दिनों 14 मंडलों के स्तर पर निविदा आमंत्रित किए गए थे। निविदा में प्राप्त दरों को मंजूरी के लिए कैबिनेट में रखा गया था, जिसे मंजूरी दे दी गई है।

गाजियाबाद में फॉरेंसिक लैब के लिए 60 करोड़ रुपये का अनुमोदन
कैबिनेट ने गाजियाबाद में बन रहे क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला के भवन के पुनरीक्षित निर्माण के लिए 60 करोड़ रुपये कैबिनेट ने अनुमोदित कर दिया है।
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जेई व एईएस प्रभावित 10 जिलों में सुधरेगी पेयजलापूर्ति व्यवस्था

- फोटो : amar ujala
जेई और एईएस से प्रभावित 10 जिलों की 17 नगर निकायों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुधारा जाएगा। इसके लिए लखनऊ नगर निगम के पीएलए खाते में पड़े 23.76 करोड़ 78 हजार रुपये दिया जाएगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है।

इस राशि से सभी 10 जिलों की 17 नगर निकायों की मलिन बस्तियों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की परियोजना पूरी कराई जाएगी। जिन जिलों में काम कराया जाना है, उनमें आजमगढ़, बहराइच, बलरामपुर, बस्ती, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महाराजगंज, संत कबीर नगर और सिद्धार्थनगर शामिल हैं।
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