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सपा-बसपा गठबंधन मजबूरी का, ये ज्यादा दिन चलने वाला नहीं: जेपी नड्डा

Mon, 08 Apr 2019 04:34 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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भाजपा के उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी जेपी नड्डा - फोटो : amar ujala
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भाजपा के उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी जेपी नड्डा दावा करते हैं कि यूपी में इस बार उनकी पार्टी को 74 से ज्यादा सीटें मिलेंगी। न तो कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का कोई असर चलेगा और न गठबंधन ही कोई प्रभाव दिखा पाएगा।

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चुनाव प्रत्याशियों का नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनाम अन्य का है। देश की जनता इस बार प्रत्याशियों के आधार पर नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री को चुनने के लिए वोट करने जा रही है। देश में इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुकाबले का कोई नेता नहीं है। इसलिए लोग उनके नाम और चेहरे पर भाजपा को वोट करेंगे।

सपा-बसपा का गठबंधन स्वाभाविक नहीं मजबूरी का है। यह ज्यादा दिन चलने वाला नहीं। एससी-एसटी एक्ट और विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती में रोस्टर में बदलाव से कहीं कोई नाराजगी नहीं है। ये फैसले ‘सबका साथ-सबका विकास’ की नीति के तहत किए गए हैं। लोग भाजपा के पक्ष में हैं। नड्डा रविवार को लखनऊ में ‘अमर उजाला’ के सवालों का जवाब दे रहे थे।
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सवाल: सपा-बसपा गठबंधन का कितना असर रहेगा?
जवाब:
गठबंधन के नेताओं के बयानों में ही उनकी कमजोरी झलक रही है। इनकी बातों से लगता है कि इन्हें जितनी उम्मीद थी उतना लाभ नहीं हो रहा है। यूपी की जनता ने सपा और बसपा की सरकारों का कामकाज देखा है।  जैसा हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि चुनाव फिजिक्स है, केमेस्ट्री नहीं। इसलिए सपा व बसपा के जोड़ से वोट का भी जोड़ फिट नहीं होने वाला। वैसे भी सपा और बसपा की केमेस्ट्री बैठ नहीं रही है।

'पांच साल में यूपी में मजबूत हुई है भाजपा की जमीन'

सवाल: आप प्रभारी हैं, क्या परिणाम रहेगा?
जवाब:
पांच वर्ष में भाजपा ने यूपी में अपनी जमीन बहुत मजबूत की है। मोदी सरकार की उपलब्धियां, योगी सरकार का काम जनता के बीच है। कार्यकर्ता और जनता का भरोसा मोदी पर है। लोग देश को मजबूती प्रदान करने के लिए मतदान करेंगे। यूपी में मिशन 74 प्लस पूरा कर लोग मोदी और भाजपा को आशीर्वाद देने जा रहे हैं।

सवाल: चुनाव में मुख्य मुद्दे क्या हैं?
जवाब:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा, उनका नाम और काम ही मुख्य मुद्दा है। पांच वर्ष में मोदी ने देश की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा है। राजनीतिक संस्कृति को बदला है। ‘सबका साथ-सबका विकास’ के आधार पर सभी को साथ लेकर चले हैं। लोगों ने मोदी के काम पर मुहर लगा दी है।

सवाल: प्रियंका गांधी वाड्रा का कितना असर रहेगा?
जवाब:
मैं इतना ही कह सकता हूं कि राजनीतिक दृष्टि से सेवा करना एक साधना है। साधना करने पर ही जनता के मन में विश्वास पैदा होता है। यदि कुछ लोग चुनाव से ठीक पहले जनता के बीच आ जाएं तो बात बनेगी नहीं। यूपी की जनता बहुत समझदार है। सोच-समझकर मतदान करेगी। प्रियंका का कोई असर नतीजों पर नहीं पड़ने वाला।

हार के डर से ही वायनाड चुनाव लड़ने गए हैं राहुल गांधी

सवाल: अमेठी और रायबरेली में मुकाबला कैसा रहेगा?
जवाब:
दोनों सीटों पर भाजपा पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस ने भी मान लिया है कि अमेठी और रायबरेली इस बार खतरे में है। अमेठी में दिख रही हार के डर से ही राहुल चुनाव लड़ने वायनाड गए हैं।

सवाल:  मुलायम सिंह यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की थी, क्या भाजपा उन्हें चुनाव जिताना चाहती है?
जवाब:
मुलायम सिंह जी ने सदन में मोदीजी की खुले मन से तारीफ की थी। पर, भाजपा ने पूरी ईमानदारी के साथ सभी सीटों को जीतने के लिए प्रत्याशी उतारे हैं। एक-एक सीट पर पूरी ताकत से चुनाव लड़ा जा रहा है।

सवाल:  एससी-एसटी एक्ट लागू करने और 13 प्वाइंट रोस्टर हटाने से क्या सवर्ण मतदाताओं की नाराजगी से नुकसान नहीं होगा?
जवाब:
भाजपा सबका साथ सबका विकास के सिद्धांत पर काम कर रही है। पांच वर्ष में सरकार समाज के वंचित, शोषित और कमजोर वर्ग को आगे लाई है। आरक्षित वर्ग के अधिकार में कटौती किए बिना गरीब सवर्णों के लिए भी दस प्रतिशत आरक्षण लागू किया है।
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'कानून-व्यवस्था में सुधार का दिखेगा सकारात्मक असर'

सवाल:  योगी सरकार के कामकाज का चुनाव पर कितना असर पड़ेगा?
जवाब:
प्रदेश में कानून-व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। मतदाताओं पर इसका सकारात्मक प्रभाव नजर आ रहा है। अन्य क्षेत्रों में भी योगी सरकार ने काफी बेहतर काम किया है।

सवाल:  सांसदों की छवि को लेकर जनता और कार्यकर्ता में नाराजगी भी सामने आई है, इसे कैसे नियंत्रित करेंगे?
जवाब:
अधिकतर सांसदों का काम संतोषजनक है। मतदाता सिर्फ मोदी को देख रहा है। हमारी कोशिश रही है कि सर्वश्रेष्ठ को ही मौका दिया जाए। उसी आधार पर टिकट दिए हैं। जहां तक कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सवाल है तो भाजपा काडर बेस पार्टी है। कार्यकर्ता पूरी ताकत से भाजपा को जिताने के लिए चुनाव मैदान में जुटा है। जिस तरह सपा, बसपा के नेता भाजपा की सदस्यता ले रहे हैं, उससे साबित होता है कि भाजपा का आधार बहुत मजबूत है।
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