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Lucknow News: यूरोलॉजी विभाग में दवा घोटाले में फंसे कर्मचारियों को हटाया

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केजीएमयू।
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लखनऊ। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के तहत कैंसर मरीजों को मिलने वाली महंगी दवा व इंजेक्शन में घोटाले के आरोप में दवा वितरण में लगे सभी कर्मचारियों को हटा दिया गया है। इन्हें विभागाध्यक्ष कार्यालय से संबद्ध किया गया है। साथ ही, जांच पूरी होने तक लखनऊ न छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
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यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के तहत पंजीकृत गरीब कैंसर मरीजों का इलाज मुफ्त होता है, मगर मरीजों के नाम पर महंगी दवाओं की फर्जी खपत दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। बजट के आंकड़ों ने इस शक को पुख्ता किया। अक्तूबर-नवंबर में जहां दवाओं की खपत लगभग 10 लाख रुपये थी, वहीं फरवरी में यह करीब 40 लाख और मार्च में 45 लाख रुपये पार कर गया। महंगी दवाओं के इस तेजी से बढ़ते बजट पर जब अधिकारियों को शक हुआ, तो उन्होंने बिलों और डॉक्टरों के परचों का ऑडिट शुरू कराया। ऑडिट में भारी गड़बड़ियां मिलीं। कागजों पर कुछ मरीजों को महीने में 4 से 5 ऐसे प्रोटीन और ताकत के इंजेक्शन लगा दिए गए, जो नियमतः 6 महीने में केवल एक बार ही लगाए जाते हैं। इस एक इंजेक्शन की कीमत 8 से 10 हजार रुपये है। इसके अलावा, कैंसर मरीजों को भर्ती कर ही यह दवाएं लगाने का नियम है, जिसका पूरी तरह उल्लंघन किया गया।



आज आएगी रिपोर्ट



अधिकारियों ने शुरुआती जांच के आधार पर करीब 2 करोड़ रुपये की दवाओं के घपले की आशंका जताई है। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट सोमवार तक सौंपेगी, जिसके बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी, उनसे रिकवरी होगी और उनकी सेवा भी समाप्त की जाएगी।
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