उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) 20 हजार स्टूडेंट्स के भविष्य पर कानूनी राय लेगा। असल में तय समय सीमा में संबद्धता के लिए आवेदन न करने वाले 44 कॉलेज फंस गए थे।
यूपीटीयू ने सेमेस्टर परीक्षा में इन कॉलेजों के छात्रों को बैठने से रोक दिया था। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर इन कॉलेजों के 20 हजार स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हुए।
अब इनके रिजल्ट को लेकर मामला फंसता जा रहा है। यूपीटीयू का कहना है कि मामला कोर्ट का होने के कारण वे कोई फैसला नहीं ले सकते। कानूनी राय लेकर मामले का निस्तारण किया जाएगा।
इस प्रकरण पर जब यूपीटीयू कुलपति डॉ. आरके खांडल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश पर स्टूडेंट्स को परीक्षा में शामिल किया गया था।
ऐसे में अपने स्तर पर तो कोई निर्णय लिया ही नहीं जा सकता। मामला कोर्ट का होने के कारण हम इस पर कोई फैसला अपने स्तर पर नहीं ले सकते। यह बेहद पेचीदा मामला है और इस पर कानूनी सलाह लेकर ही कोई निर्णय लेने की कोशिश की जाएगी।
इधर, सूत्रों की मानें तो इम्तिहान दे चुके स्टूडेंट्स का रिजल्ट तो यूपीटीयू को घोषित करना ही होगा। वह उसे रोक इसलिए नहीं सकता क्योंकि स्टूडेंट्स ने कोर्ट के आदेश पर परीक्षा दी है।
फिर यूपीटीयू प्रशासन ने ही परीक्षा के समय खुद इन स्टूडेंट्स को परीक्षा में बैठाना का निर्णय लिया था।
हालांकि रिजल्ट के संबंध में कोर्ट ने कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए हैं लेकिन बिना कानूनी राय लिए यूपीटीयू अपने स्तर पर इस मामले का हल नहीं कर सकता।
यही कारण है कि वह इस मुद्दे पर कानूनी राय लेकर ही कोई अंतिम निर्णय लेगा।