हाईकोर्ट के आदेश पर गाजियाबाद के यूपीएसआईडीसी घोटाले की जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच दल) ने राज्य सरकार से एक बार फिर मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने की अनुमति मांगी है।
मुकदमा पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के अलावा तत्कालीन आठ अधिकारी व अभियंताओं के खिलाफ दर्ज होना है। इनमें दो आईएएस व दो पीसीएस के नाम शामिल हैं।
इन पर करोड़ों की लेन-देन कर गाजियाबाद में 18 व्यावसायिक भूखंडों के भू-उपयोग परिवर्तित करने में अनियमितता के आरोप हैं। कुल मिलाकर मामला करीब 1000 करोड़ रुपये के घोटाले का है।
सरकार ने अभी यह अनुमति नहीं दी है, हालांकि इस पर विचार करने के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है।
इस मामले में एसआईटी एक बार पहले भी राज्य सरकार से मुकदमा दर्ज करने की अनुमति मांग चुकी है। लेकिन तब अनुमति न देकर विभिन्न बिंदुओं पर अतिरिक्त आख्या मांगी गई थी।
अदालत ने जांच के आदेश देते समय छह माह में जांच पूरा करने को कहा था। इसमें अनावश्यक विलंब को लेकर पिछले दिनों अदालत ने नाराजगी भी दिखाई थी।
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एसआईटी द्वारा शासन को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद भी कई महीनों तक इसे दबाए रखा गया।
इस पर अदालत ने तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह को अवमानना नोटिस जारी कर स्वयं हाजिर होने के आदेश दिए थे।
तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव को जुलाई में अदालत के समक्ष हाजिर होकर सफाई देनी पड़ी थी। उन्होंने तब कहा था कि प्रारंभिक जांच में संबंधित दस्तावेजों की फोटोकॉपी की पड़ताल हुई है।
मूल दस्तावेज मांगे गए हैं, जिनके मुहैया होने के बाद संतोषजनक जांच हो सकेगी। प्रमुख सचिव गृह ने इसके लिए अदालत से अतिरिक्त समय मांगा। तब पिछले महीने अदालत ने इस मामले की जांच एक माह में पूरा करने का आदेश दिया था।
इस निर्देश पर एसआईटी ने कुछ दिनों पहले अपनी प्रारंभिक जांच पूरी की और शासन को रिपोर्ट सौंप कर मुकदमा दर्ज करने की अनुमति मांगी।
गृह सचिव कमल सक्सेना ने बताया कि एसआईटी ने यह अनुमति कुछ दिनों पहले मांगी है। इस प्रकरण पर विचार करने के लिए कुछ दिनों में एक बैठक बुलाई गई है। उन्होंने गोपनीयता का हवाला देते हुए इससे अधिक कुछ भी कहने से मना कर दिया।
एक आरोपी को काबीना मंत्री का दर्जा
एसआईटी जांच के घेरे में आए पूर्व आईएएस तपेंद्र प्रसाद ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। वर्तमान में वह प्रशासनिक सुधार विभाग के सलाहकार हैं। उन्हें काबीना मंत्री का दर्जा हासिल है।
18 भूखंडों के आवंटन में गड़बड़ी
एसआईटी के अधिकारियों के मुताबिक जांच सिर्फ गाजियाबाद जिले में यूपीएसआईडीसी द्वारा आवंटित व्यावसायिक भूखंडों के भू-उपयोग बदलने की हुई है।
जांच में पाया गया कि एक-दो नहीं बल्कि 18 बड़े भूखंडों में भू-उपयोग बदल कर व्यावसायिक घरानों को सीधा लाभ पहुंचाया गया।
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इसमें करोड़ों के वारे-न्यारे हुए। एसआईटी ने भू-उपयोग बदलने में बरती गई अनियमितता के न सिर्फ दस्तावेजी साक्ष्य हासिल किए बल्कि इसके लिए संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए।
यूपीसीडा करता था भू-उपयोग परिवर्तन
यूपीएसआईडीसी द्वारा आवंटित होने वाले भूखंडों का भू-उपयोग परिवर्तित करने का अधिकार सरकार ने यूपीसीडा (यूपी स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) को दिया था।
जिन 18 भूखंडों के भू-उपयोग परिवर्तन में धांधली पाई गई है, वे सभी यूपीसीडा से जारी आदेश पर हुए। इसके लिए यूपीसीडा में बुलाई जाने वाली बैठकों में शासन का एक प्रतिनिधि भी शामिल होता था।
बाबू सिंह कुशवाहा तब खनन मंत्री भी थे। वह विभाग के विशेष सचिव को इसमें शामिल होने के लिए भेज देते थे।
बाबू सिंह थे यूपीसीडा के अध्यक्ष
एसआईटी जांच में पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा इसलिए फंसे हैं क्योंकि वह यूपीसीडा के अध्यक्ष थे।
एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया है कि लेन-देन कर भूखंडों के भू-उपयोग में जो परिवर्तन किया गया, वह पूर्व मंत्री के इशारे पर हुआ।
इस घोटाले में जो अधिकारी और अभियंता शामिल हुए, वे भी पूर्व मंत्री के साथ फंसे हैं।