लखनऊ। नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक शुक्रवार को हंगामे और आरोप-प्रतिवाद के बीच बिना नतीजे के समाप्त हो गई। सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक दोपहर दो बजे तक चली, लेकिन एजेंडे के किसी प्रस्ताव पर चर्चा तक नहीं हो सकी।
कार्यकारिणी सदस्य अफसरों के जवाबों से संतुष्ट नहीं हुए और बैठक को स्थगित कर दिया गया। अब शनिवार सुबह 11 बजे दोबारा बैठक होगी। बैठक में केवल उपाध्यक्ष पद का चुनाव हो सका। पार्षद अनुराग मिश्रा ने चरनजीत गांधी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिस पर सर्वसम्मति से सहमति बनी और वह निर्विरोध चुनी गईं।
सीवर सफाई पर विवाद
चर्चा के दौरान सदस्य अरुण राय ने कहा कि सीवर सफाई व्यवस्था बेहद खराब है। जिस सुएज कंपनी को काम मिला है, उसने कई छोटे पेटी ठेकेदारों को यह जिम्मेदारी दे रखी है। चिनहट प्रथम वार्ड में जल निगम का ठेकेदार शैलेंद्र सफाई करा रहा है, जिससे काम की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कई सदस्यों ने इसे अनुबंध का उल्लंघन बताते हुए नाराजगी जताई। महापौर ने इस पर जलकल जीएम और सचिव को जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
लाइट मरम्मत व कर्मचारियों की कमी का मुद्दा
बैठक में मार्ग प्रकाश व्यवस्था भी प्रमुख मुद्दा रही। सदस्यों ने पूछा कि ईईएसएल को हटाने के बाद लाइटों की मरम्मत के इंतजाम क्यों नहीं किए गए। अपर नगर आयुक्त ललित कुमार ने बताया कि 100 कर्मचारी बढ़ाए गए हैं और बजट पास हो चुका है, लेकिन सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और लिखित जवाब मांगा।
मृतक आश्रित की नियुक्ति में देरी
प्रचार विभाग के एक अनुचर की सड़क हादसे में मौत के आठ माह बाद भी उसकी पत्नी की नियुक्ति नहीं हो पाई। इस मामले को उठाते हुए सदस्यों ने अन्य लंबित मामलों की रिपोर्ट भी मांगी।
अब तीन महीने हो गए हैं, कुछ बोलिए
बैठक के दौरान नगर आयुक्त ज्यादातर चुप्पी साधे रहे। महापौर सुषमा खर्कवाल ने टोका कि अब तीन महीने हो गए हैं, कुछ बोलिए। इसके बाद आयुक्त ने जवाब दिए, लेकिन सदस्य असंतुष्ट रहे। नतीजतन फैसला हुआ कि आगे चर्चा अब तभी होगी, जब अफसर लिखित जवाब देंगे।
नगर निगम कार्यकारिणी बैठक