मार्च में अखिलेश ने की थी आखिरी जनसभा
राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल सपा अध्यक्ष के दौरे की तुलना में सीएम काफी आगे निकल चुके हैं। सपा अध्यक्ष ने बीते मार्च में दादरी में सार्वजनिक रैली की थी। बीते चार महीने में विपक्ष की कोई बड़ी रैली नहीं हुई है।
वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी में आखिरी बड़ी रैली पिछले साल 9 अक्तूबर को की थी। चुनाव नजदीक होने के बावजूद भाजपा और सपा की तुलना में बसपा जमीन पर सबसे कम सक्रिय दिख रही है। जबकि सीएम योगी ने पूरे प्रदेश का एक चक्र पूरा कर चुके हैं।
100 और एक' का फर्क
रैलियों के लिहाज से आंकड़े देखें तो योगी और अखिलेश में '100 और एक' का फर्क साफ नजर आता है। योगी की इसी जमीनी सक्रियता का नतीजा है कि दो टर्म के शासन के बाद भी उनकी लोकप्रियता पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।