लखनऊ के केजीएमयू डॉक्टरों ने दिमाग की नस फटने से हुए हैमरेज की शिकार 45 वर्षीय महिला का बिना चीरा लगाए सफल इलाज किया। एंडोवास्कुलर तकनीक से पैर की नस के रास्ते कैथेटर डालकर फटी नस का उपचार किया गया। आयुष्मान कार्ड से महिला का मुफ्त इलाज हुआ और उसकी हालत में सुधार आया।
केजीएमयू के डॉक्टरों ने दिमाग की नस फटने से हैमरेज की शिकार महिला की बिना चीरा इलाज करके जान बचा ली है। महिला के दिमाग की दाहिनी आर्टरी में एन्यूरिज्म फट गया था। इससे उसे तेज सिरदर्द, उल्टी और अधिक कमजोरी हुई। डॉक्टरों का कहना है समय पर इलाज न मिलने पर जान तक जा सकती थी।
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मलिहाबाद निवासी 45 वर्षीय महिला को तेज सिरदर्द हुआ। उल्टियां होने लगी। चलने-फिरन में दिक्कत हुई। आनन-फानन परिवारीजन मरीज को लेकर नजदीकी अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने महिला को ब्रेन हैमरेज बताया। मरीज की हालत गंभीर बताते हुए केजीएमयू भेज दिया। परिवारीजन मरीज को लेकर केजीएमयू पहुंचे। डॉक्टर की सलाह पर सीटी स्कैन जांच हुई। जांच में एन्यूरिज्म का पता चला।
इसके बाद मरीज को इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग शिफ्ट किया गया। यहां डॉक्टरों ने एंडोवास्कुलर तकनीक से इलाज करने का फैसला किया। रेडियोडायग्नोसिस विभाग के डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि इसमें सिर में चीरा लगाने के बजाए पैर की नस के रास्ते कैथेटर डाला गया। कैथेटर को दिमाग तक पहुंचा गया। बैलून की मदद से फटी नस के हिस्से का इलाज किया गया।
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खून के बहाव को रोका गया। डॉ. मनोज कुमार और डॉ. सौरभ कुमार ने एनेस्थीसिया विभाग की टीम के सहयोग से प्रक्रिया पूरी की।डॉ. मनोज ने बताया कि महिला की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। आयुष्मान कार्ड पर मुफ्त इलाज हुआ। डॉक्टरों की निगरानी में महिला की हालत लगातार सुधरती गई। 17 सितंबर को उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया। अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।