फ़र्ज़ी खातों का इस्तेमाल
एसटीएफ के मुताबिक़ निवेशकों से मिली रकम फर्जी कंपनियों के नाम से खोले गए बैंक खातों में पहुंचाई जाती थी। वहां से रकम कई खातों में भेजी जाती और बाद में यूएसडीटी में बदलकर दुबई में बैठे गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाई जाती थी।
सोशल मीडिया पर ऐसे फंसाते थे
गिरोह इंस्टाग्राम और फेसबुक पर शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश की ट्रेनिंग के नाम पर विज्ञापन चलाता था। संपर्क में आने वालों को VIP9-6 ACI Exclusive Guidance Group नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा जाता था। ग्रुप में विशेषज्ञ बनकर निवेश की जानकारी दी जाती थी। फर्जी मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाकर लोगों को बड़ी रकम लगाने के लिए तैयार किया जाता था। इसके बाद ऐप के जरिये निवेश कराया जाता था।
3087 शिकायतों से सामने आया बड़ा नेटवर्क
एसटीएफ की जांच में गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला होने की जानकारी सामने आई है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस गिरोह से जुड़ी 3087 ऑनलाइन शिकायतें मिलने की जानकारी सामने आई है। इससे बड़ी संख्या में लोगों के साथ ठगी किए जाने का पता चला है।
पहले चार आरोपी भी पकड़े जा चुके
मामले में एसटीएफ पहले भी चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। अनुनाग अरविंद श्रीवास्तव को 31 जुलाई को नागपुर, विनोद कुमार राठौर को 22 अगस्त को मध्यप्रदेश के झाबुआ और सुधीर गंगाधर दास व शेख नदीम सलीम को 23 अगस्त को महाराष्ट्र के काशीगांव थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। विवेक के खिलाफ लखनऊ और अन्य स्थानों पर कुल 11 केस दर्ज होने की जानकारी मिली है। अंडमान-निकोबार के साइबर क्राइम थाने में भी उसके खिलाफ केस दर्ज है।