गरीबी उन्मूलन के लिए सूबे के 22 जिलों में बतौर पायलट आधार प्रोजेक्ट शुरू की गई राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना) तेलंगाना मॉडल पर आगे बढ़ाई जाएगी। इसके लिए सभी जिलों के चयनित ब्लॉकों में कार्यालय खोले जाएंगे।
योजना के तहन इन 22 जिलों के एक-एक ब्लॉक में मिशन के काम होंगे। इसमें सबसे पहले महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन होगा।
हर गांव के प्रत्येक गरीब परिवार की कम से कम एक महिला सदस्य को समूह का सदस्य बनाना है। इसके बाद इन समूहों का बैंक में खाता खुलवाया जाएगा। सभी समूहों को उच्चस्तरीय ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद इन्हें बैंकों से कम्युनिटी फंड दिलाया जाएगा।
खास बात ये है कि सरकार ने मिशन को लागू करने के लिए तेलंगाना के कुछ कार्मिकों की सेवाएं लेनी शुरू कर दी हैं। इसके अलावा उपायुक्त स्वत: रोजगार को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अलावा कोई अन्य जिम्मेदारी न देने की भी हिदायत दी गई है।
मुख्य सचिव ने दिए खास निर्देश
अधिकारी बताते हैं कि गरीबी उन्मूलन में तेलांगाना का प्रयोग बेहद कारगर रहा है। सरकार ने अधिकारियों से खास तौर से हिदायत दी है कि वहां से आए कार्मिकों के वेतन, टीए, डीए व भत्तों के समय से भुगतान में कोई कोताही न बरती जाए।
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इन जिलों के जिलाधिकारियों को इस काम को शीर्ष प्राथमिकता देकर आगे बढ़ाने को कहा है।
इन जिलों में लागू की गई योजना
- अंबेडकरनगर, बहराइच, सोनभद्र, लखीमपुर खीरी, देवरिया, मिर्जापुर, हरदोई, चंदौली, बांदा, हमीरपुर, जालौन, बदायूं, बस्ती, बागपत, बिजनौर, इलाहाबाद, आगरा, इटावा, औरैया, शामली, आजमगढ़, अलीगढ़।