मुसीबत के समय किसानों की मदद के लिए बनाई गई कृषक दुर्घटना बीमा योजना आजकल तंगहाली से गुजर रही है। महीनों के इंतजार के बावजूद किसानों को इससे आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है।
सूबे के 2.50 करोड़ खातेदार, सहखातेदार किसानों के लिए कृषक दुर्घटना बीमा योजना लागू है। इसमें आग, बाढ़, बिजली गिरने, नदी, तालाब, पोखर व कुएं में डूबने, मकान गिरने, डकैती, दंगा, मारपीट व आतंकवादी घटना जैसे अप्राकृतिक कारणों या अन्य दुर्घटना में मौत पर आश्रितों को पांच-पांच लाख रुपये की मदद दी जाती है।
स्थायी अपंगता व कई तरह से शारीरिक क्षति पर 50 से 25 प्रतिशत राशि दी जाती है। हाल यह है कि किसानों की मदद के आवेदन लगातार आते जा रहे हैं, लेकिन जिलों को पैसा नहीं मिल पा रहा। पिछले दिनों मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कृषक दुर्घटना बीमा योजना की समीक्षा की तो पूरी तस्वीर सामने आई।
पता चला कि राजस्व परिषद के पास अप्रैल 2014 तक ही 9287 किसानों को आर्थिक सहायता दिलाने की अर्जी लंबित है।
इनके भुगतान के लिए जिलों को बमुश्किल 200 करोड़ रुपये ही दिए जा सके। इससे करीब चार हजार दावों का ही भुगतान किया जा सकता है। बाकी 5287 दावों के निपटारे के लिए पैसे की कमी बनी हुई है।