बहराइच में भेड़ियों के हमले में नौ लोगों की जान जाने के बाद बाराबंकी के डीएफओ आकाशदीप बधावन, तीन डिप्टी रेंजर व वन विभाग समेत 10 कर्मचारियों की विशेष टीम बहराइच में डेरा डाले है। टीम चार ड्रोन कैमरों के सहारे भेड़ियों पर नजर रख रही है। रणनीति है कि भेड़ियों को किसी भी हालत में गांव या रिहायशी क्षेत्रों में नहीं जाने दिया जाएगा। ऐसे में नरभक्षी भेड़ियों को दूसरे शिकार पर निर्भर होना पड़ेगा। इस तरह उनकी बिगड़ी आदत को सुधारा जाएगा।
बहराइच में टीम की अगुवाई कर रहे बाराबंकी के डीएफओ आकाशदीप बधावन ने बताया कि भेड़िया सामाजिक प्राणी है। आमतौर पर वह आबादी व इंसान से दूर रहना पसंद करते हैं। वह झुंड में ही रहते हैं। महसी इलाके में एक लंगड़े भेड़िये ने बच्चे को आसान शिकार समझकर निवाला बनाया। उस मांस को कई भेड़ियों ने खाया। स्वाद मुंह में लगा, जिसके बाद अन्य भेड़िये भी उसी राह पर चले पड़े। इसके बाद उनकी प्रवृत्ति नरभक्षी हो गई। वह इंसान, खासकर बच्चों को खोज रहे हैं। भेड़िया कुत्ता परिवार का प्राणी है। उनके सूंघने व जागने की आदत बहुत तेज होती है।
तेंदुआ समेत कई वन्य जीवों को रेस्क्यू कर चुके टीम के सदस्य डिप्टी रेंजर मोहित श्रीवास्तव बताते हैं कि हमारी टीम की रणनीति है कि भेड़ियों को किसी भी हालत में आबादी की तरफ न जाने दिया जाय। इसके लिए सुरक्षा घेरा बनाया गया है। टीम ट्रेंकुलाइजर गन के साथ मुस्तैद है। हम चार ड्रोन कैमरों से जंगल व खेतों में भेड़ियों की ट्रैकिंग कर रहे हैं। मकसद भेड़ियों को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ना है। इस रणनीति के तहत सफलता मिल रही है। टीम को एक साथ विचरण कर रहे तीन भेड़ियों का पता चला है। हमने उन्हें चिह्नित किया है। बुधवार सुबह गन्ने के खेत के पाास भेड़ियों को घेरा भी था, लेकिन 800 मीटर की दूरी होने के कारण वे भाग निकले। सुखद यह है कि बाराबंकी से टीम आने के बाद बुधवार शाम तक भेड़ियों के हमले का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।