अटल और आडवानी की जोड़ी थी उस समय प्रमुख चेहरा।
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उत्तर प्रदेश में भाजपा की विकास यात्रा ऐसे राजनीतिक उतार-चढ़ाव की कहानी है, जिसने राज्य की सत्ता का समीकरण ही बदल दिया। साल 1985 में महज 16 सीटों से शुरुआत करने वाली भाजपा आज 255 विधायकों के साथ प्रदेश की निर्णायक शक्ति बन चुकी है।
भाजपा के अब तक के इतिहास को देखें तो 1980 में गठन के बाद शुरुआती वर्षों में पार्टी हाशिये पर रही लेकिन 1990 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन ने व्यापक जनसमर्थन दिलाया। 1991 के विधानसभा चुनाव में 221 सीटें जीतकर भाजपा ने पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने।साल 1993 और 1996 में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो बनी लेकिन बहुमत के अभाव में सरकारें अस्थिर रहीं। वर्ष 1997 से 2002 के बीच कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह के नेतृत्व में सरकार चली लेकिन संगठनात्मक स्थिरता नहीं बन सकी।
भाजपा का ग्राफ 2002 के बाद तेजी से गिरा। पार्टी 2002 में 88 सीटों से घटकर 2007 में 51 और 2012 में 47 सीटों पर सिमट गई। इस दौरान सपा और बसपा ने प्रदेश की राजनीति पर वर्चस्व बनाए रखा। भाजपा के लिए 2014 के लोकसभा चुनाव ने निर्णायक वापसी की जमीन तैयार की। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने यूपी की 80 में 71 सीटें जीतकर रिकॉर्ड बनाया। इसी लहर का असर विधानसभा चुनाव 2017 में दिखा, जब भाजपा ने 312 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया।
37 साल बाद बनी लगातार दूसरी बार सरकार
केंद्र में मोदी तो प्रदेश में योगी की है सरकार।
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योगी आदित्यनाथ के 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद भाजपा ने संगठन और शासन स्तर पर पकड़ मजबूत की। पार्टी ने 2022 में 255 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई जो 37 साल में पहली बार हुआ। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा की सीटें घटकर 33 रह गईं लेकिन प्रदेश की सत्ता पर पकड़ बनी हुई है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो भाजपा की यह यात्रा संघर्ष, गिरावट और फिर प्रचंड वापसी की कहानी है जिसने प्रदेश की राजनीति को नए सिरे से परिभाषित किया है।
विधानसभा में ऐसा रहा चुनावी सफर
1985: 16 सीट
1991: 221 सीट
2007: 51 सीट
2017: 312 सीट
2022: 255 सीट
बीते तीन लोकसभा चुनाव में हालत
2014: 71
2019: 62
2024: 33