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UP: फेसबुक पर विदेशी युवती बनकर फंसाया, फिर 68 लाख ठगे, नाइजीरियन तस्कर 10 करोड़ की ड्रग्स के साथ गिरफ्तार

Sat, 18 Jul 2026 11:12 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

आरोपी नाइजीरिया का रहने वाला है। उसके पास से 5.085 किलोग्राम मेथाम्फेटामाइन  बरामद हुई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।   
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गिरफ्तार किया गया आरोपी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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फेसबुक और इंस्टाग्राम पर विदेशी युवती या युवक बनकर दोस्ती करना, महंगे गिफ्ट और विदेशी मुद्रा भेजने का झांसा देना, फिर कस्टम और आयकर के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लेना। यूपी एसटीएफ ने ऐसे ही एक अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के सक्रिय सदस्य को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी नाइजीरिया का रहने वाला है। उसके पास से 5.085 किलोग्राम मेथाम्फेटामाइन (आइस ड्रग) बरामद हुई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

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एसटीएफ एएसपी विशाल विक्रम के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान ओबासे प्रॉस्पर के रूप में हुई है। वह नाइजीरिया के इमो स्टेट का रहने वाला है और दक्षिणी दिल्ली के राजू पार्क इलाके में रह रहा था। संयुक्त कार्रवाई में एसटीएफ और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने उसके कब्जे से पांच मोबाइल फोन और दो पासपोर्ट भी बरामद किए हैं।

गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाता था। इन प्रोफाइल के जरिए भारतीय युवक-युवतियों से दोस्ती की जाती थी। भरोसा जीतने के बाद महंगे गिफ्ट, डॉलर और पाउंड भेजने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद गिरोह के सदस्य खुद को कस्टम या आयकर विभाग का अधिकारी बताकर फोन करते और पार्सल छुड़ाने के नाम पर मोटी रकम वसूल लेते थे।
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इस तरह ठगी के केस का हुआ खुलासा 
आरोपी को ड्रग्स तस्करी में पकड़ा गया था लेकिन जब उससे पूछताछ हुई और मोबाइल खंगाला गया तो पता चला कि लखनऊ के डालीगंज निवासी एक युवक से 68 लाख रुपये की ठगी आरोपी व उसके साथियों ने मिलकर की थी। इसमें उसका साथी उचेनवा भी शामिल था। उसे यूनाइटेड किंगडम के नाम से फर्जी आरबीएस सर्टिफिकेट भी भेजा गया था, ताकि उसे भरोसा हो जाए कि विदेश से रकम और सामान भेजा गया है। इस मामले में मदेयगंज थाने में पहले से मुकदमा दर्ज है।

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अवैध रह रहा था आरोपी 

पूछताछ में ओबासे ने बताया कि वह 2023 में मेडिकल वीजा पर भारत आया था। वीजा खत्म होने के बाद भी वह दिल्ली में अवैध रूप से रह रहा था। उसने स्वीकार किया कि उसके कई नाइजीरियन साथी दिल्ली में रहकर सोशल मीडिया के जरिए साइबर ठगी और मादक पदार्थों की तस्करी कर रहे हैं। एसटीएफ के मुताबिक इसी साल 15 मई को उचेनवा भी गिरफ्तार किया जा चुका है। 

डिजिटल वॉलेट व मोबाइल की फोरेंसिक जांच 
अब आरोपी के बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि गिरोह ने देश के कई राज्यों में इसी तरीके से लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है।
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