त्रिवेणी सिंह ने बताया कि इस मामले में मुख्य सरगना अरविंद के बैंक खातों को खंगाला जा रहा है। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह ठगी 10 से 15 लोगों के साथ हुई है। अन्य के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां भी जल्द हो सकती हैं।
नर्स की भर्ती के नाम पर भी हुआ खेल
त्रिवेणी सिंह ने बताया कि सिर्फ कम्प्यूटर ऑपरेटर ही नहीं बल्कि नर्स के पदों पर भी भर्ती के नाम पर जालसाजों ने खेल किया है। उसमें यह गिरोह शामिल है या नहीं, इसकी तफ्तीश की जा रही है। साथ ही अन्य गिरोह पर भी नजर रखी जा रही है।
केजीएमयू प्रशासन बिना रजिस्ट्रेशन वाली कंपनी अवनि परिधि के कर्मचारियों से काम ले रहा था। शनिवार को मामला खुला तो देर रात आननफानन में कंपनी को काली सूची में डालने की कार्रवाई शुरू की गई। जबकि इस कंपनी पर यूपीएसआईसी ने आजीवन प्रतिबंध लगा रखा है।
अरविंद की नियुक्ति भी इसी कंपनी ने की थी। कंपनी को उत्तर प्रदेश लगु उद्योग निगम (यूपीएसआईसी) ने आजीवन प्रतिबंधित कर रखा है। यूपीएसआईसी के मुताबिक, अवनि परिधि 31 अक्टूबर 2017 तक के लिए ही पंजीकृत थी। केजीएमयू प्रशासन ने कंपनी की वैधता की जांच पड़ताल करने की जरूरत नहीं समझी। पिछले दिनों यूपीएसआईसी के एमडी हीरालाल ने इस कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया।
इस संबंध में प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों और सभी सीएमओ को पत्र भी जारी कर दिया था। शनिवार को मामला खुलने के बाद केजीएमयू प्रशासन की नींद खुली। शनिवार रात चीफ प्राक्टर आरएएस कुशवाहा ने कुलसचिव को पत्र लिख कंपनी को काली सूची में डालने को कहा। कुलसचिव राजेश राय का कहना है कि कंपनी को काली सूची में डाला जा रहा है।