प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के शिक्षकों के शैक्षिक व नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन अब एसटीएफ और बेसिक शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से करेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर विभाग ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत जिला स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालयों में शिक्षकों के अभिलेख जमा कराए जा रहे हैं।
बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से जारी आदेश के अनुसार, सभी शिक्षकों को हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, बीएड, बीटीसी, डीएलएड-बीएलएड, टीईटी-सीटीईटी और नियुक्ति से संबंधित सभी प्रमाणपत्र जमा करने होंगे। इसके अलावा नोटरी से सत्यापित शपथपत्र देना भी अनिवार्य किया गया है। इसमें विभाग में कार्यरत या सेवानिवृत्त निकट संबंधियों का पूरा विवरण देना होगा।
इसमें पति-पत्नी, माता-पिता, पुत्र-पुत्री, दामाद-बहू, सास-ससुर, साला-बहनोई, साली-ननद और चचेरे, फुफेरे व ममेरे भाई-बहनों सहित अन्य रिश्तेदारों की जानकारी देनी होगी। यदि कोई निकट संबंधी विभाग में कार्यरत या सेवानिवृत्त नहीं है, तो शिक्षक को इस संबंध में भी शपथपत्र देना होगा।
एसटीएफ के रेंज कार्यालय भेजे जाएंगे अभिलेख
निदेशक ने सभी बीएसए को बीईओ के माध्यम से जल्द दस्तावेज एकत्र करने के निर्देश दिए हैं। अभिलेख निर्धारित एक्सेल शीट में दर्ज कर बीएसए कार्यालय से एसटीएफ के संबंधित रेंज कार्यालय भेजे जाएंगे। रेंज अधिकारी इनके सत्यापन की व्यवस्था करेंगे। जरूरत पड़ने पर पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस आयुक्त का सहयोग लिया जाएगा। जांच में बेसिक शिक्षा विभाग हर स्तर पर मदद करेगा। इस प्रक्रिया के लिए जिला स्तर पर बीएसए, मंडल स्तर पर संबंधित सहायक शिक्षा अधिकारी और प्रदेश स्तर पर सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
एक प्रमाणपत्र पर 10 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला
दरअसल, विभाग में एक ही प्रमाणपत्र के आधार पर 10 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आया था। इस पर संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कक्षा एक से आठ तक के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच के निर्देश दिए थे। कुछ शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का विश्वविद्यालय स्तर पर सत्यापन कराने में भी दिक्कतें आई हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। जिला स्तर पर ऐसे मामलों में कार्रवाई हुई है, लेकिन कई बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद प्रदेश में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की कुल संख्या का ब्योरा एकत्र नहीं हो सका। मौजूदा सत्यापन प्रक्रिया से ऐसे मामलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।