SP-Congress Alliance: 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में सपा, कांग्रेस को ज्यादा सीट देने के मूड में नहीं है। मालूम हो कि दोनों पार्टियों ने लोकसभा का चुनाव साथ में मिलकर लड़ा था।
आगामी विधानसभा चुनाव में सपा, कांग्रेस को ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि अधिकतर सीटों पर संगठन को मजबूत करने का काम हो रहा है। जो दावेदार हैं, उन्हें बूथों पर पीडीए के बीच जनाधार बढ़ाने का काम दिया गया है।
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सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के गठबंधन को लेकर 80-17 के बयान के बाद सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा गरम है। हालांकि अभी चुनाव दूर हैं, लेकिन सपा सूत्रों का कहना है कि इमरान मसूद का बयान कांग्रेस की रणनीति का ही हिस्सा है। इसमें दूसरी पंक्ति के नेताओं से बयान दिलवाकर पार्टी नेतृत्व पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, सपा किसी भी हालत में कांग्रेस के लिए 35-40 से ज्यादा सीटें नहीं देगी।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि जिस राज्य में इंडिया गठबंधन में शामिल जो दल मजबूत है, वहां का नेतृत्व उसी दल के हाथ में होना चाहिए। इसी रणनीति के तहत अखिलेश ने दिल्ली चुनाव में कांग्रेस के बजाय आम आदमी पार्टी का समर्थन किया। जबकि, कांग्रेस और आप दोनों ही इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं।
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सपा के एक वरिष्ठ नेता नाम न छापने के अनुरोध के साथ कहते हैं कि सपा, कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटें देने का काम कभी नहीं करेगी। क्योंकि, यह उसके लिए आत्मघाती कदम होगा। वैसे भी यूपी में कांग्रेस का कोई मजबूत जनाधार नहीं है। कांग्रेस नेतृत्व जितनी सीटें मांगते हैं, उन सीटों के लिए उनके पास प्रत्याशी तक नहीं होते। वे यहां तक कहते हैं कि सीटें लेने के बाद कांग्रेस को प्रत्याशी भी सपा को ही देने होते हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में यह देखा जा चुका है। 2017 का चुनाव दोनों दलों ने मिलकर लड़ा था।