गत वर्ष नवंबर माह में बेटी को जन्म देने वाली साक्षी ने बताया कि मैंने अपनी बेटी का नाम जापान की स्टार महिला पहलवान के नाम साओरी योशिदा से प्रभावित होकर योशिदा रखा है। पहलवानों के परिवार में जन्मी हैं तो चाहती हूं कि बेटी भी पहलवान बने, लेकिन उस पर कभी दबाब नहीं डालूंगी। इतना जरूर चाहती हूं कि योशिदा बड़ी होकर खेलों से जरूर जुड़े, क्योंकि खेलों में अनुशासन से जीवन बेहतर हाेता है।
लखनऊ को जुड़ी तमाम खट्टी मीठी यादें
लखनऊ साई सेंटर में लंबा वक्त ट्रेनिंग में बिताया है। यहां ट्रेनिंग के दौरान बिताया अनुशासित जीवन हमेशा याद आता है। ट्रेनिंग के दौरान तमाम खट्टी मीठी यादें भी जुड़ी है, जो आज भी जेहन में है। लखनऊ में जयपुरिया स्कूल के खेल समारोह की जानकारी मिलते ही यहां आने को फौरन तैयार हो गई। कुछ मिलाकर जब भी लखनऊ का नाम आता है तो यहां यहां के साई सेंटर से जुड़ी पुरानी अच्छी यादें कौंध जाती हैं।
खेलों में आगे बढ़ने में अभिभावकों की भूमिका सबसे ज्यादा
मेरे विचार से खेलों में आगे बढ़ने के लिए बच्चों क अभिभावकों की भूमिका सबसे ज्यादा होती है। जब तक अभिभावक मन से अपने बच्चों को खेलों से जोड़ने की कोशिश नहीं करेंगे, दिक्कतें बढ़ती रहेंगी। साथ ही आज के खिलाड़ियों में एकाग्रता बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि आज मोबाइल व अन्य गैजेट्स के रहते ट्रेनिंग करना आसान नहीं होता है। जब तक एकाग्रता नहीं होगी, तब तक आगे बढ़ने की राह नहीं खुलेगी।