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UP: भगवान भरोसे जेल, मंत्रीजी की सेवा में जेलर!

Tue, 05 Aug 2014 12:33 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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उत्तर प्रदेश में कायदे-कानून जरा अलग हैं। यह माननीयों के मुताबिक पुलिस अफसरों की ड्यूटी लगाई जाती है।
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अब शशिकांत मिश्रा को ही लीजिए। मिश्रा एक जेलर हैं लेकिन आजकल उनकी ड्यूटी स्टेट प्रोटोकॉल मंत्री अभिषेक मिश्रा के गोमतीनगर स्थित निवास पर लगी है, जिसे 'ऑफिसर ऑन स्पेश्ल ड्यूटी' का टैग दिया गया है।

इतना ही नहीं, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने भी जेल स्टाफ को अपनी 'सेवा' से मुक्त नहीं किया है।

यह तब है जब राजेंद्र चौधरी से कारागार विभाग ले लिया गया है और अब वह राजनीतिक पेंशन विभाग के मंत्री हैं।
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100 से ज्यादा जेल स्टाफ कर रहे हैं पर्सनल ड्यूटी

एक अनुमान के मुताबिक, 100 से भी ज्यादा जेल वार्डर्स और दर्जन भर जेलर नेताओं और मंत्रियों की व्यक्तिगत ड्यूटी में लगाए गए हैं।

मजे की बात यह है कि जेल स्टाफ को इन नेताओं और मंत्रियों के यहां पर्सनल असिस्टेंट के अलावा घरेलू काम देखने की भी जिम्मेदारी होती है। अभिषेक मिश्रा का कहना है, शशिकांत मिश्रा मेरे साथ ओएसडी के तौर पर काम करते हैं।

वहीं, राजेंद्र चौधरी पहले तो उनके लिए अभी भी जेल स्टाफ के काम करने सम्बंधी बात पर अ‌नभिज्ञता जताते हैं, लेकिन फिर कहते हैं कि अगर ऐसा है तो इसके पीछे कुछ औपचारिकताएं होंगी, जो अभी पूरी करनी होंगी।

जेल प्रशासन से जुड़े एक अफसर का कहना था कि हेडक्वार्टर की तरफ से हमें यह मंत्रियों और नेताओं के दफ्तर में काम करने का आदेश मिलता है लेकिन जाने के बाद घरेलू काम करने में लगा दिया जाता है।
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कहां तक सही है ऐसी व्यक्तिगत तैनाती

वहीं, जेल विभाग से जुड़ें एक अफसर का कहना है इस तरह की तैनाती के पीछे कोई आधिकारिक बात नहीं है। यह तैनाती विभाग के उच्चाधिकारियों की समझ के मुताबिक होती हैं।

हालांकि सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश के 75 जिलों के 69 जेलों में 8,000 वार्डर्स की‌ नियुक्ति होनी चाह‌िए, जिसमें 2,500 ‌पद खाली हैं।

माना जा रहा है कि इस तरह जेल स्टाफ की तैनाती करना न सिर्फ जेल प्रशासन के लिए नुकसादेह बल्कि इससे कई बार सुरक्षा पर भी असर पड़ता है। अभी हाल ही में लखीमपुर से दो ‌कैदी भागने में सफल हो गए थे।
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