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महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों को सजा दिलाने में यूपी नंबर वन, एडीजी कानून-व्यवस्था का दावा

Sun, 04 Oct 2020 11:31 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों को सजा दिलाने में पिछले वर्ष यूपी देश में नंबर एक पर रहा है। पिछले साल प्रदेश में महिलाओं के प्रति अपराध के 15,579 मामलों में सजा दिलाई गई। अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वर्ष 2019 के जारी आंकड़ों के हवाले से यह दावा किया। 
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प्रशांत कुमार ने बताया कि साइबर अपराध के 272 मामलों में भी अपराधियों को सजा दिलाकर उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर रहा। इसी तरह बीते वर्ष रिकॉर्ड 3 लाख 87 हजार अपराधियों को गिरफ्तार कर यूपी ने पहला स्थान हासिल किया। 2018 में यूपी दूसरे स्थान पर था। 

वहीं आबादी के लिहाज से 2019 में हत्या व हत्या के प्रयास की घटनाओं में यूपी पूरे देश में 28वें नंबर पर, लूट में 23वें, बलात्कार के मामलों में 26वें, नकबजनी में 30वें, आईटी एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के मामलों में पांचवें स्थान पर रहा है। उन्होंने बताया कि अन्य अपराधों के नियंत्रण में भी पिछले वर्षों की अपेक्षा काफी बेहतर स्थिति रही है।
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बलात्कार और हत्या के मामलों में कमी 
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में बलात्कार की घटनाओं में कमी आई है। 2018 में यहां बलात्कार की 3277 घटनाएं हुई थीं, जबकि 2019 में 3065 घटनाएं हुईं। इसी तरह 2018 में हत्या की 4018 घटनाएं हुई थीं, जबकि 2019 में 3806 घटनाएं हुईं। वहीं, 2018 में यूपी में महिलाओं के प्रति अपराध की 59,445 घटनाएं हुई थीं, जबकि 2019 में 59,853 घटनाएं हुईं। 2017 में यह आंकड़ा 56,011 था। 
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जघन्य अपराधों में अभियुक्तों को कड़ी सजा दिलाएं

डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी - फोटो : अमर उजाला
विवेचकों की मनमानी को रोकने के लिए अधिकारियों के उदासीन व दिखावे के पर्यवेक्षण को लेकर डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि प्रभावी पर्यवेक्षण के लिए नियम-कानून की कमी नहीं है। डीजीपी ने अधिकारियों से कहा है कि दोषपूर्ण विवेचना से जहां अभियुक्तों को लाभ मिलता है, वहीं आमजन में पुलिस के प्रति प्रतिकूल धारणा बनती है।

लिहाजा सुनिश्चित करें कि आपराधिक मामलों, विशेष रूप से जघन्य अपराधों की विवेचना का स्तर उच्च कोटि का हो, जिससे अभियुक्तों को कड़ी सजा दिलाने में मदद मिल सके। डीजीपी ने कहा है कि आज पर्यवेक्षण केवल लंबित विवेचनाओं का शीघ्र निस्तारण किए जाने का निर्देश देने तक सीमित होकर रह गया है।

उसकी गुणवत्ता तथा निष्पक्षता का मूल्यांकन करके निर्देश अंकित करना और उनका अनुश्रवण करना वरिष्ठ अधिकारियों की प्राथमिकताओं में या तो है ही नहीं अथवा बहुत सतही है। उन्होंने अपेक्षा की है कि पर्यवेक्षण अधिकारी तथा वरिष्ठ अधिकारी विवेचना की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रभावी व सार्थक हस्तक्षेप करेंगे। उन्होंने निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किए जाने को कहा है। 
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