डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी
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विवेचकों की मनमानी को रोकने के लिए अधिकारियों के उदासीन व दिखावे के पर्यवेक्षण को लेकर डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि प्रभावी पर्यवेक्षण के लिए नियम-कानून की कमी नहीं है। डीजीपी ने अधिकारियों से कहा है कि दोषपूर्ण विवेचना से जहां अभियुक्तों को लाभ मिलता है, वहीं आमजन में पुलिस के प्रति प्रतिकूल धारणा बनती है।
लिहाजा सुनिश्चित करें कि आपराधिक मामलों, विशेष रूप से जघन्य अपराधों की विवेचना का स्तर उच्च कोटि का हो, जिससे अभियुक्तों को कड़ी सजा दिलाने में मदद मिल सके। डीजीपी ने कहा है कि आज पर्यवेक्षण केवल लंबित विवेचनाओं का शीघ्र निस्तारण किए जाने का निर्देश देने तक सीमित होकर रह गया है।
उसकी गुणवत्ता तथा निष्पक्षता का मूल्यांकन करके निर्देश अंकित करना और उनका अनुश्रवण करना वरिष्ठ अधिकारियों की प्राथमिकताओं में या तो है ही नहीं अथवा बहुत सतही है। उन्होंने अपेक्षा की है कि पर्यवेक्षण अधिकारी तथा वरिष्ठ अधिकारी विवेचना की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रभावी व सार्थक हस्तक्षेप करेंगे। उन्होंने निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किए जाने को कहा है।