ऐसा पहली बार हुआ है कि मुख्य सचिव समेत छह से ज्यादा नौकरशाह एक साथ नियामक आयोग पहुंचे। इससे साफ है कि निजीकरण के मसले पर आयोग की चिह्नित कमियां महत्वपूर्ण है। आयोग ने 7 जुलाई को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की सुनवाई का आदेश दिया था लेकिन दो दिन पहले इसे स्थगित कर दिया। अब पहली सुनवाई 9 जुलाई को केस्को कानपुर में होगी।
उपभोक्ता परिषद ने की जांच की मांग
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने निजीकरण से जुड़े हर कदम की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि एकसाथ इतने अफसरों का पहुंचना साबित करता है कि आयोग ने गंभीर वित्तीय व सांविधानिक कमियां उजागर की हैं। ऐसे में दबाव बनाकर प्रस्ताव पास कराने की कोशिश की जा रही है। वर्मा ने कहा कि बिजली दर सुनवाई के दौरान भी निजीकरण से जुड़े हर पहलू में बरती लापरवाही का मुद्दा उठाया जाएगा।