गौरव आनंद ने परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर शिकायत की है कि उन्हें फोकॉम नेट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से हाथरस में एआरटीओ में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर तैनाती दी गई। उन्होंने नौकरी ज्वॉइन की तथा उनकी आईडी भी बनाई गई। लेकिन महज हफ्तेभर बाद उन्हें बाहर कर दिया गया। ऐसे ही इटावा के रहने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि उनका स्थानांतरण इटावा से उरई कर दिया। पांच दिन बाद उरई से हटाकर ललितपुर कर दिया गया। तीन दिन बाद महोबा भेज दिया गया। लेकिन वहां यह कहकर लौटा दिया गया कि पर्याप्त कर्मचारी हैं। उन्होंने बताया कि प्राइवेटकर्मियों से भर्ती के नाम पर वसूली भी की गई है।
अमर उजाला लखनऊ संस्करण में सोमवार को ''कर्मचारियों से ही वसूली जा रही उनकी पगार'' शीर्षक खबर प्रकाशित की गई। इसके बाद परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने तत्परता दिखाते हुए अपर परिवहन आयुक्त आईटी सुनीता वर्मा से मामले को लेकर बातचीत की है। सूत्र बताते हैं कि निजी कंपनियों के मालिकों से भी पूछताछ होगी तथा प्रोजेक्ट मैनेजर हटाए जा सकते हैं।
प्रदेश में डीएल का कामकाज देखने वाली निजी कंपनियों के प्रतिनिधि बेलगाम हैं और परिवहन विभाग के अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि प्राइवेट कर्मियों से भर्ती के नाम पर खूब वसूली हुई है। इसका एक हिस्सा अफसरों व प्रोजेक्ट मैनेजरों के जरिए कंपनियों के मालिकों तक पहुंचा है। यही वजह है कि शिकायतों के बाद भी अफसर मौने साधे हुए हैं।