रजिस्ट्री के रैंडम निरीक्षण के टारगेट तय किए गए हैं। शासन ने जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी और सहायक महानिरीक्षक निबंधन को हर महीने क्रमशः 5, 25 और 50 लेखपत्रों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। उपनिबंधकों को भी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अंतर्गत बाजार मूल्य के अनुसार देव स्टांप शुल्क से संबंधित लेखपत्रों में से सदर के प्रत्येक उप निबंधक द्वारा 20 और तहसील में तैनात उप निबंधकों द्वारा 10 रजिस्ट्री का सत्यापन हर महीने कराया जाएगा। साफ निर्देश दिए गए हैं कि निरीक्षण स्वयं उप निबंधक करेंगे और किसी भी सूरत में अपने अधीनस्थों के जरिये सत्यापन नहीं कराएंगे।
मुकदमों की संख्या में आएगी कमी
स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल का कहना है कि चार वर्ष की लंबी अवधि में भूखंड या संपत्ति की प्रकृति में बदलाव संभव है लेकिन, इस वजह से आम लोग बेवजह उत्पीड़न का शिकार हो रहे थे। लोगों को राहत देने के लिए रजिस्ट्री कराने के तीन महीने के अंदर (विशेष परिस्थितियों को छोड़कर) ही स्थलीय निरीक्षण की व्यवस्था की गई है। इस फैसले से अदालतों में मुकदमों की संख्या घटेगी।