कृषि विशेषज्ञ डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि अक्तूबर तक लगातार बारिश ने किसानों को टमाटर की नर्सरी तैयार करने का मौका ही नहीं दिया। लखनऊ में नवंबर तक फैजाबाद, उन्नाव, बाराबंकी और आजमगढ़ से टमाटर की आपूर्ति आती है, जहां अभिलाष, नामधारी 585 और परी जैसी प्रजातियां लगाई जाती हैं। इस बार नर्सरी तैयार न होने से टमाटर का रकबा कम हुआ और बारिश के बाद वायरस का खतरा भी दिसंबर तक बना रहता है।
राजधानी के ग्रामीण इलाकों में बैंगन और करेला की खेती पहले ही सीमित है। करेला मुख्य रूप से हरदोई में होता है। बख्शी का तालाब और चिनहट बैंगन के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं।