सूबे में पुलिसकर्मियों को मानवाधिकारों के साथ ही नए कानूनों और महिलाओं व बच्चों से अच्छा व्यवहार करने की सीख दी जाएगी।
इसके लिए बाकायदा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा और सभी रेंज में एक अलग सेल का गठन किया जाएगा।
इसकी जिम्मेदारी रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षकों को दी गई है।
डीजीपी देवराज नागर ने बुधवार को पीएसी मुख्यालय में हुई पुलिस उप महानिरीक्षकों की बैठक में इस संबंध में जरूरी निर्देश दिए।
डीजीपी ने मातहत अधिकारियों से कहा कि सभी जिलों व रेंज में दो दिन का सम्मेलन किया जाए, जिसमें पुलिसकर्मियों की समस्याओं को सुनकर उनका निपटारा किया जाए।
पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए हर रेंज में एक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की जाए। रेंज मुख्यालय के बाद जिलों में इनकी स्थापना की जाएगी।
इन प्रशिक्षण केंद्रों में पुलिस कर्मियों को नए कानूनों, अध्यादेशों में बदलाव, डीजीपी मुख्यालय द्वारा समय-समय पर जारी होने वाले निर्देश, अदालतों द्वारा विभिन्न मामलों में किए गए फैसलों, मानवीय संवेदनाओं, महिलाओं व बच्चों से अच्छे व्यवहार की जानकारी दी जाएगी।
बैठक में यातायात सुधार व सड़क हादसों की रोकथाम के लिए किए जाने वाले प्रयासों की भी समीक्षा की गई।
जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सिपाहियों व दीवान के सेवा संबंधी दस्तावेज समय पर मुहैया कराएं जिससे उनके प्रमोशन में विलंब न हो।
बैठक में जिलों के पुलिस नियंत्रण कक्ष की बेहतरी के लिए आधुनिक उपकरणों की खरीद और अपराध की स्थिति व उसकी रोकथाम के प्रयासों की समीक्षा भी की जानी थी, लेकिन अपराध संबंधित बिंदु पर चर्चा नहीं हो सकी।
सूत्रों के मुताबिक डीजीपी ने इस बात पर अधिक बल दिया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि को लेकर संतुष्ट नहीं हैं।
वे पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने में कोताही बरते जाने की घटनाओं पर भी नाराज हैं। डीजीपी ने इस दिशा में जरूरी कदम उठाने की ताकीद की।
बैठक में एडीजी सूर्य कुमार शुक्ला, सुबेश कुमार सिंह, भावेश कुमार और मुकुल गोयल के अलावा आईजी अभिसूचना अनिल मिश्र, आईजी स्थापना वितुल कुमार और आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता के अलावा सभी रेंज के डीआईजी शामिल थे।