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आखिर सच साबित हुई यूपी पुलिस की थ्योरी

Tue, 26 Nov 2013 01:15 AM IST
विष्णु मोहन/लखनऊ
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आखिरकार नतीजा वही निकला जो यूपी पुलिस ने घटना के फौरन बाद निकाल लिया था।
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सीबीआई ने इस मामले में यूपी पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया था और उसकी थ्योरी को सिरे से नकार दिया था।

सीबीआई ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट भी लगाने की कोशिश की थी और इसका भी ठीकरा यूपी पुलिस के सिर फोड़ा था।

लेकिन अदालत के रवैये पर फिर से तफ्तीश करने पर मजबूर हुई। सीबीआई ने आखिरकार उन्हीं तथ्यों को सामने रखा जिनके आधार पर यूपी पुलिस ने डॉ. राजेश तलवार की गिरफ्तारी की थी।

शुरुआती दौर में नोएडा पुलिस की तफ्तीश में कई ऐसी खामियां रह गई थीं, जिनका तलवार दंपती को सीधा लाभ मिलता रहा।

पढ़ें-तलवार दम्पत्ति दोषी करार, सजा का एलान कल

जिस दिन आरुषि की लाश बरामद हुई, उसी दिन डॉ. तलवार के घर की छत की सीढ़ी पर खून के धब्बे देखे गए थे, लेकिन पुलिस ने छत का दरवाजा खुलवाने की जरूरत तक नहीं समझी थी।
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अपने नौकर हेमराज का कत्ल करने के बाद डॉ. तलवार ने उसकी लाश छत पर छिपा दी थी।

अफसरों के तफ्तीश से जुड़ते ही गहराने लगा संदेह
बाद में तफ्तीश में पुलिस के सीनियर अफसर जुड़े। अफसरों का मानना था कि डॉ. तलवार ने जानबूझ कर हेमराज की लाश को छत पर छिपाया था।

वे लाश को बाद में गायब कर देना चाहते थे जिससे आरुषि के कत्ल का इल्जाम हेमराज पर मढ़ सकें।

गौरतलब है कि जब आरुषि की लाश बरामद हुई तो डॉ. तलवार ने कत्ल का संदेह अपने नौकर हेमराज पर जताते हुए पुलिस को यह बताया था कि हेमराज लापता है।

हालांकि, डॉ. तलवार ने बेटी का कत्ल बाहरी व्यक्ति द्वारा किए जाने की बात भी कही थी लेकिन पहले दिन ही उनकी इस कहानी के गलत होने के पुलिस के पास सुबूत थे।

घर का दरवाजा बाहर से बंद था और उसकी चाबी डॉ. तलवार के पास ही थी। ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति के घर में प्रवेश करने की बात सही नहीं हो सकती थी।

पुलिस की मेहनत पर फिरा पानी
जिस तरह आरुषि और हेमराज के सिर पर वार करने के बाद सर्जरी के चाकू से उनका गला काटा गया, उससे भी जाहिर हो रहा था कि कत्ल करने वाले को चिकित्सीय जानकारी है।

मौके से खून के निशान मिटाए जाने, बालिका के अंगों को साफ किए जाने, कमरे से खून से लथपथ चादर को हटाए जाने, छत के दरवाजे की चाबी डॉ. राजेश तलवार से बरामद होने आदि के तमाम बिंदुओं से इतना साफ था कि कत्ल के पीछे डॉ. राजेश का हाथ था।

इसी आधार पर यूपी पुलिस ने बाद में उन्हें गिरफ्तार करा था। लेकिन जैसे ही मामला सीबीआई के पास पहुंचा, यूपी पुलिस की दो सप्ताह की मेहनत पर पानी फिर गया था।
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...और सीबीआई ने दे दी क्लीनचिट
सीबीआई ने अपनी जांच में 11 जुलाई 2008 को डॉ. राजेश तलवार व डॉ. नूपुर को क्लीन चिट दे दी थी।

सीबीआई ने इसके साथ ही हेमराज के साथियों कृष्णा, राज कुमार व विजय मंडल को हत्यारा बताया था।

इनकी गिरफ्तारी कर पूछताछ हुई थी, लेकिन कुछ ठोस तथ्य सामने नहीं आ सके थे। इस बीच डासना जेल में 50 दिन तक रहने के बाद डॉ. तलवार को रिहा कर दिया गया था।

जांच एजेंसी को करना पड़ा फजीहत का सामना
बाद में सीबीआई ने अदालत में साक्ष्यों के न मिलने की जिम्मेदारी यूपी पुलिस पर मढ़ते हुए प्रकरण में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी।

अदालत के निर्देश पर सीबीआई को दोबारा जांच करनी पड़ी और फिर उन्हीं तथ्यों को अदालत के सामने रखा गया, जिनके आधार पर यूपी पुलिस ने कार्रवाई की थी। इस पूरे मामले में सीबीआई को खासी फजीहत का सामना करना पड़ा।
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