प्रदेश की मौजूदा सरकार जिस पुलिस पर सबसे अधिक भरोसा रखती है और उसे अपराधियों पर कार्रवाई के लिए खुली छूट दे रखी है, उसी पुलिस के खिलाफ बीते साढ़े चार साल में सबसे अधिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
पुलिस विभाग से मिले आंकड़ों की मानें तो बीते साढ़े चार सालों में 16 आईपीएस और 25 से अधिक पीपीएस अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। मौजूदा समय में भी 22 पुलिस अधिकारी निलंबित चल रहे हैं जिन्हें बहाली का इंतजार है। इसमें 4 आईपीएस और 18 पीपीएस अधिकारी शामिल हैं। निलंबित चल रहे अधिकारियों में कई ऐसे हैं जो दो साल से अधिक समय से निलंबित हैं।
एडीजी रैंक के अधिकारी जसवीर सिंह को सेवा आचरण नियमावली के उल्लंघन में 14 फरवरी 2019 में निलंबित किया गया था। उन पर एक वेबसाइट पर सरकार के विरोध में इंटरव्यू देने का आरोप लगा था। जसवीर सिंह अब भी निलंबित हैं। डीआईजी रैंक के अधिकारी अनंत देव बिकरू कांड के बाद निलंबित किए गए थे। निलंबित चल रहे महोबा के तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार और प्रयागराज से निलंबित किए गए अभिषेक दीक्षित को भी अपनी बहाली का इंतजार है। इन अधिकारियों को भी निलंबित हुए एक साल का समय बीत चुका है।
वहीं पीपीएस अधिकारियों में बृहस्पतिवार को निलंबित किए गए अपर पुलिस अधीक्षक विकास त्रिपाठी को लेकर कुल 18 अधिकारी निलंबित चल रहे हैं। इसमें चार अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के और 14 पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। अपर पुलिस अधीक्षकों में विकास के अलावा ओम प्रकाश सिंह, एमपी चौहान, दिनेश कुमार द्विवेदी शामिल हैं।
वहीं पुलिस उपाधीक्षकों में भगवान सिंह, राम दास प्रसाद, राम शब्द, चंद्र केश सिंह, सुशील कुमार, गिरीश कुमार सिंह, जितेंद्र सिंह परिहार, करमवीर सिंह, नवनीत कुमार नायक, कृपा शंकर कन्नौजिया, प्रयंक जैन, जगमोहन सिंह, प्रशिक्षु नितिन तनेजा और बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किए गए अमरेश कुमार सिंह बघेल शामिल हैं। इसमें कई अधिकारी ऐसे हैं जिनका निलंबन एक साल से अधिक समय से है।
मिल रहा आधा वेतन, काम भी कुछ नहीं
निलंबित अधिकारियों को सरकार की ओर से आधा वेतन दिया जा रहा है। साथ निलंबित होने के कारण इन अधिकारियों के पास कोई काम भी नहीं है। कहने को यह पुलिस मुख्यालय से अटैच हैं लेकिन इसमें से अधिकतर आफिस आते ही नहीं। अगर आते भी हैं तो बस अटेंडेंस लगा कर वापस चले जाते हैं। इस बारे में डीजीपी मुकुल गोयल का कहना है कि जो भी अधिकारी निलंबित चल रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई चल रही है। कार्रवाई पूरी होने पर उनकी बहाली का निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।