वहीं, पंचायती राज विभाग के सूत्रों के मुताबिक निदेशक पंचायती राज ने 12 जनवरी को हाईकोर्ट में एक हलफनामा दिया था। ये हलफनामा एक पीआईएल पर जवाब देते हुए दाखिल किया गया था। इसमें कहा गया है कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के लिए पत्रावली शासन को भेज दी गई है। शीघ्र ही निर्णय होने की संभावना है। इसकी पुष्टि शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों ने की है। उनका कहना है कि ये हलफनामा पंचायत चुनाव के समय को लेकर तिथियों की स्पष्टता पर मौन है। ऐसे में माना जा रहा है कि समय से चुनाव होने की संभावना कम ही दिखती है।
दरअसल समय से पंचायत चुनाव कराने में सबसे बड़ी बाधा जातिवार सीटों का आरक्षण तय करना। बता दें जनगणना 2011 के अनुसार, राज्य में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का प्रतिशत क्रमशः 20.6982 और 0.5677 प्रतिशत है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इन वर्गों के लिए इतनी ही प्रतिशत सीटें आरक्षित करनी होंगी। इसमें ओबीसी जातियों का प्रतिशत जनगणना में शामिल नहीं था। जबकि रैपिड सर्वे 2015 के अनुसार, राज्य की ग्रामीण आबादी में अन्य पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी 53.33 प्रतिशत थी। 2021 के चुनाव में इसी सर्वे के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण तय किया गया था। ऐसे में इस बार पंचायत चुनाव में ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रतिशत 27 प्रतिशत रखना अनिवार्य है। इसलिए अबकी बार संख्या में हुए बदलाव को ध्यान में रखते हुए आरक्षण तय करने में समय लग सकता है।