असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए न्यूनतम अर्हता बीटेक के साथ एमटेक है। इसके बाद भी पीजी की अधिकतर सीटें खाली रहना चिंता का विषय हैं। शिक्षकों का कहना है कि कंप्यूटर साइंस कोर्स करने के बाद युवाओं को सहज रूप से जॉब उपलब्ध हो रही है। इसमें साफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी देने के लिए बहुत बड़े सिस्टम की जरूरत नहीं पड़ती है। साफ्टवेयर पायरेटेड भी चल जाता है। जबकि सिविल व मैकेनिकल ब्रांच में मशीन, टरबाइन, बोल्ड मीटर, पैनल आदि जुड़ी हुई चीजें चाहिए होती है। किंतु खरीद से जुड़ी प्रक्रिया इतनी जटिल है कि सरकारी संस्थान इससे भागते हैं। इसकी वजह से भी छात्र इस तरफ नहीं आते हैं।
विभागीय अधिकारियों की उपेक्षा भी
प्राविधिक शिक्षा विभाग में नए संस्थान खोलने पर तो जोर दिया गया लेकिन अधिकारी भौतिक स्थिति की जांच के लिए यहां कभी नहीं पहुंचे। इसकी वजह से भी कई संस्थान काम चलाऊ तरीके से ही लैब चला रहे हैं।
जहां छात्र ज्यादा, वहां भेजे जाएं शिक्षक
राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में एक तरफ जहां छात्रों का सामान्य ब्रांच में टोटा बना है। वहीं शिक्षक पर्याप्त संख्या में तैनात हैं। जनभवन में हुई बैठक में निर्देश दिया गया कि राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में आपस में शिक्षक स्थानांतरित किए जा सकें, इसके लिए आवश्यक नियम बनाने को कहा गया। इससे इन शिक्षकों को आवश्यकतानुसार जहां ज्यादा छात्र हैं, वहां भेजने की व्यवस्था हो सकेगी। अभी इस पर सैद्धांतिक सहमति होना बाकी है।
प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल का कहना है कि सिविल, मैकेनिकल व केमिकल इंजीनियरिंग की मदर ब्रांच है। इनकी अभी भी उपयोगिता है। इनको आज की जरूरत के अनुसार एआई, मेकाट्रॉनिक्स, मशीन लर्निंग आदि के साथ मिलाकर अपग्रेड करेंगे। छात्रहित में युवाओं को कॉलेजों की कंसलटेंसी में शामिल करेंगे और इसकी आय में भी उनको लाभ देंगे।