पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्राचीन धरोहरों की स्थापत्य शैली, मूर्तिकला व भवनों की बनावट अमूल्य धरोहर को दर्शाती है। लोग इनका इतिहास जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। इसलिए ऐसे स्मारकों, भवनों को संरक्षण जरूरी है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित प्राचीन स्मारकों व धरोहरों को संरक्षित करने के लिए उनका सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना बनाने को कहा है। साथ ही उप्र राज्य पुरातत्व द्वारा संरक्षण के लिए प्रस्तावित प्राचीन स्मारकों व स्थलों को संरक्षित करने के निर्देश दिए हैं।
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पर्यटन मंत्री मंगलवार को उप्र राज्य पुरातत्व परामर्शदात्री समिति की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन धरोहरों की स्थापत्य शैली, मूर्तिकला व भवनों की बनावट अमूल्य धरोहर को दर्शाती है। लोग इनका इतिहास जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। इसलिए ऐसे स्मारकों, भवनों को संरक्षण जरूरी है। प्रदेश में बहुत से स्थानों पर टीलों की खुदाई नहीं हो सकी है। इनके नीचे कोई प्राचीन सभ्यता बहुमूल्य कलाकृतियां, अन्य अवशेष दबे हो सकते हैं। इसलिए ऐसे स्थानों का भी सर्वे करके संरक्षित किए जाने की जरूरत है। पर्यटन मंत्री ने सीतापुर में स्थित शिव मंदिर अलावलपुर, लखनऊ के बड़ा शिवाला, मुन्नालाल खेड़ा समेत अन्य स्मारकों व स्थलों को संरक्षित करने के निर्देश दिए।