कई दिग्गज मंत्री अपने महकमे के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव को बदलने की सिफारिश कर चुके हैं। तमाम मंत्री तो पार्टी के शीर्ष नेताओं तक नौकरशाही के कारण आ रही दिक्कतों को रख चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रदेश सरकार में मंत्रियों और नौकरशाही के बीच चल रही खींचतान सतह पर आ गई है। कई विभागों में मंत्रियों और आला अधिकारियों में तालमेल की कमी के कारण विभागीय कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। कई दिग्गज मंत्री अपने महकमे के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव को बदलने की सिफारिश कर चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
विज्ञापन
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह की भी विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव व सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिन अनिल गर्ग से नहीं पट रही है। वे दोनों को बदलने का आग्रह कर चुके हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद की खींचतान जगजाहिर हो चुकी है। ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री अरविंद शर्मा की भी यूपी पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एम देवराज से ठनी हुई है। देवराज की कार्यशैली को लेकर स्वयं नौकरशाह रहे शर्मा लखनऊ से दिल्ली तक शिकायतें कर चुके हैं।
-पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद का विभाग के प्रमुख सचिव नरेंद्र भूषण से तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। जितिन ने तबादलों में भूषण की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और विभाग के कामकाज पर भी कई बार नाराजगी जता चुके हैं।
विज्ञापन
-आबकारी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल के विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी से नहीं बन रही है। नितिन ने भी सरकार और संगठन में अपनी पीड़ा का इजहार किया है।
- उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह भी विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं।