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UP News : दूसरे चरण में 63 छोटे शहरों के लिए भी मास्टर प्लान, दायरे में 50 हजार से एक लाख की आबादी वाले शहर

Fri, 13 Oct 2023 07:06 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

जिन शहरों में विकास प्राधिकरण नहीं हैं उन शहरों में मौजूदा समय में छोटे शहरों में नगर निकायों के बोर्ड के नियमानुसार नक्शा पास होता है। इसमें भू-उपयोग और तल पट क्षेत्र अनुपात (एफएआर) का कोई ख्याल नहीं रखा जाता है। ऐसे में बड़े नक्शे पास करने में जमकर मनमानी होती है।
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मास्टर प्लान, सांकेतिक चित्र - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने बाद सरकार अब 50 हजार से एक लाख की आबादी वाले 63 शहरों के लिए मास्टर प्लान तैयार कराने जा रही है। मास्टर प्लान लागू होने के बाद अब इन शहरों में भी महानगरों की तर्ज पर भू-उपयोग के आधार पर नक्शा पास किया जाएगा। इसको लेकर आवास विभाग में उच्च स्तर पर हुई बैठक में सहमति बन गई है।

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दरअसल कई बैठकों में मुख्यमंत्री बड़े शहरों की तरह छोटे शहरों के भी सुनियोजित विकास कराने और भवन निर्माण के लिए मानक तैयार करने के लिए बोल चुके हैं। इसके बाद आवास विभाग भवन निर्माण एवं विकास उपविधि तैयार करने जा रहा है। इस उपविधि को उन सभी शहरों में लागू किया जाएगा, जहां पर अभी तक विकास प्राधिकरण नहीं हैं। नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत वाले शहरों में इसे अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।

आवास विभाग पहले चरण में अमृत योजना से जुड़े 59 शहरों के लिए मास्टर प्लान तैयार करा रहा है, जो अब पूरा होने वाला है। इसी कड़ी में दूसरे चरण में 63 शहरों के लिए भी मास्टर प्लान तैयार करने की कार्यवाही शुरू की रही है। इस मास्टर प्लान तैयार होने के बाद इसके मुताबिक ही भवन निर्माण की अनुमति दी जाएगी। साथ ही इन शहरों में भी भवन विकास उपविधि के मुताबिक नक्शा पास किया जाएगा।
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इसलिए जरूरी
छोटे शहरों में भवन बनाने के लिए कोई मानक न होने की वजह से अवैध निर्माण एक बड़ी समस्या बनती जा रही है और ऐसे शहरों का अनियोजित विस्तार होता जा रहा है। मॉडल विकास उपविधि के लागू न होने से लोग मनमाने तरीके से भवनों का निर्माण तेजी से कराते जा रहे हैं। खास तौर पर सड़कों से सटी जमीनों पर मानक के विपरीत आवासीय के साथ व्यावसायिक भवनों का निर्माण होने से खतरा बढ़ता जा रहा है।

अभी बोर्ड स्तर से पास होता नक्शा
जिन शहरों में विकास प्राधिकरण नहीं हैं उन शहरों में मौजूदा समय में छोटे शहरों में नगर निकायों के बोर्ड के नियमानुसार नक्शा पास होता है। इसमें भू-उपयोग और तल पट क्षेत्र अनुपात (एफएआर) का कोई ख्याल नहीं रखा जाता है। ऐसे में बड़े नक्शे पास करने में जमकर मनमानी होती है।

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