बीते पांच वर्षों के दौरान प्रदेश में हुए अग्निकांड में 2451 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, हालांकि अग्निशमन सेवा के जाबांजों की बदौलत 38 हजार से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू करने में सफलता भी मिली। खास बात ये है कि कोरोना संक्रमण के दो वर्षों के दौरान प्रदेश में अग्निकांड की घटनाएं अन्य वर्षों की अपेक्षा कम घटित हुईं।
प्रदेशवासियों को अग्नि सुरक्षा के उपायों के बारे में जागरूक करने के लिए शनिवार से अग्निशमन सुरक्षा सप्ताह की शुरुआत हुई। डीजी अग्निशमन सेवा अविनाश चंद्र ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके सरकारी आवास पर जाकर फ्लैग पिन लगाया।
अग्निशमन सुरक्षा सप्ताह के तहत नागरिकों को अग्नि से बचाव तथा सावधानी बरतने के संबंध में जागृत करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। बता दें कि इस वर्ष भारत सरकार ने अग्नि सुरक्षा का संकल्प ''''अवेयरनेस इन फायर सेफ्टी फॉर ग्रोथ ऑफ नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर'''' (अग्नि), निर्धारित किया गया है। कार्यक्रमों के तहत आग की रोकथाम की व्यवस्था, सुरक्षित एवं पर्याप्त पलायन मार्ग की व्यवस्था, पर्याप्त पहुंच मार्ग की व्यवस्था, आग की स्थिति में जीवित रहने के उपाय, उद्योगों में अग्नि सुरक्षा एवं सावधानियां, बहुमंजिले भवनों में अग्नि सुरक्षा, अपंग व्यक्तियों की सुरक्षा, पटाखों से सावधानी, फायर एक्सटिंग्यूशर का इस्तेमाल आदि के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में आग लगने की मुख्य वजह प्रदेश में अग्निकांड की सर्वाधिक घटनाएं मार्च से जून माह के बीच होती हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में खेत-खलिहान व झोपड़ियों में चिंगारी, धूम्रपान, लापरवाही, लैंप, लालटेन, खलिहानों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन के कारण होती है।
फैक्ट फाइल
- 359 फायर स्टेशन हैं स्वीकृत 75 जिलों में
- 301 हैं क्रियाशील, 49 को शुरू करने की कवायद जारी
- 6476 अधिकारी एवं कर्मचारी हैं अग्निशमन सेवा में कार्यरत