पदाधिकारियों ने बिजली कर्मियों की छंटनी पर जताई चिंता
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का कहना है कि बिजली की बढ़ती मांग और कर्मचारियों की भारी कमी से आपूर्ति व्यवस्था गड़बड़ा रही है। निगमों में कर्मचारियों की संख्या 30 हजार से कम हो गई है। समिति की फील्ड हॉस्टल में शुक्रवार को हुई बैठक में पदाधिकारियों ने बिजली कर्मियों की छंटनी पर चिंता जताई।
समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि वर्ष 2000 में करीब 60 लाख उपभोक्ता और 1.20 लाख कर्मचारी थे। अब उपभोक्ता करीब 3.73 करोड़ हो गए हैं और कर्मचारियों की संख्या 30 हजार हो गई है। वहीं, वर्ष 2000 में बिजली की मांग 6500-7000 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर लगभग 33 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है। ऐसे में सीमित कर्मचारियों के भरोसे भरपूर बिजली देने का दावा हवाई है। यही वजह है कि रोस्टर से अधिक बिजली देने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत में उपभोक्ताओं को कई घंटे कम बिजली मिल पाती है।
समिति की प्रमुख मांगें
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की कि हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए। मार्च 2023 से अब तक की सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां समाप्त की जाए। रिक्त पदों पर नियमित भर्ती हो। निजीकरण के नाम पर 45 फीसदी से अधिक संविदा कर्मियों की हुई छंटनी को खत्म किया जाए।