पुलिस पूछती रही, युवा बताते रहे...अंदर जाते रहे
ईको गार्डन के मेन गेट से ही पुलिस का भारी जमाव दिखा। प्रदर्शनकारी युवा अपने बैनर-पोस्टर लेकर गेट पर पहुंचते तो पुलिस वाले उनसे पूछते कि यहां क्यों आए हैं? किस जिले से हैं? रोका कोई नहीं जा रहा था लेकिन सबसे ये सवाल पूछे जरूर जा रहे थे।
समलैंगिक अधिकारों के समर्थक भी आए नजर
धरना स्थल पर समलैंगिक अधिकारों के समर्थक अपने मास्क लगाकर मौजूद थे तो राजधानी में हक अधिकार की बात करने वाले कई आंदोलनकारी भी नजर आए। एबीवीपी और एनएसयूआई, समाजवादी छात्र सभा जैसे प्रमुख छात्र संगठनों की उपस्थिति नहीं दिखी।
पुलिस ने झोंकी पूरी ताकत, पूरा इलाका बना छावनी
आइसा और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए पुलिस महकमे ने दो दिन खास मेहनत की। जेसीपी लॉ एंड ऑर्डर (एलओ) बबलू कुमार ने बताया कि इस प्रदर्शन के मद्देनजर साइबर क्राइम की टीम सोशल मीडिया पर होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थी। बृहस्पतिवार रात से ही ईको गार्डन में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।
स्थानीय तथा आसपास के जिलों से बुलाई पुलिस के अलावा पीएसी और आरएएफ को भी लगाया गया था। एलआईयू के कर्मचारी भी चप्पे-चप्पे पर मौजूद थे। रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
यूट्यूबर और वीडियो ब्लॉगर्स से बातचीत न करने की नसीहत
इको गार्डन में धरना-प्रदर्शन का इंतजाम करने वाली एक टीम यहां पहुंचने वाले युवाओं को मीडिया से बात न करने की सलाह देते नजर आए। सलाह देने वाली टीम छोटे-छोटे समूह में अलग-अलग प्रवेश द्वार पर मौजूद थी। ये लोग अंदर आने वालों को यूट्यूबर और वीडियो ब्लॉगर्स से बातचीत न करने की नसीहत देते रहे।
इनका कहना था कि ये लोग हमारे एजेंडे को कमजोर कर रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन के समर्थकों के अलावा एक गुट ऐसा भी था जो भारत माता की जय के नारे लगा रहा था। इनमें से कुछ ने कहा कि कॉकरोच पार्टी वालों की वजह से हमारी मांगे कमजोर होती जा रही हैं।
प्रदर्शन में शामिल अनिल कुमार ने बताया कि कुछ अराजक तत्व भी यहां आ गए हैं, जो अलग-अलग बातें कह रहे हैं। लखनऊ के सचिन ने बताया कि हमने ही प्रदर्शन के लिए आवाज बुलंद की और अब हमारी ही आवाज दब गई है। बाहर से आए लोग मुखर हैं। जौनपुर के अनूप ने बताया कि यह अफवाह फैलाई गई कि प्रदर्शन के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं मिली लेकिन यहां पर काफी भीड़ है। यह अफवाह नहीं होती तो भीड़ दोगुनी होती।