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UP: असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय, श्रम विभाग ने सात सेक्टरों की सूची जारी की

Fri, 30 May 2025 01:34 PM IST
ishwar ashish अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ

सार

असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को उत्पीड़न से बचाने के लिए श्रम विभाग ने सात सेक्टरों में न्यूनतम मजदूरी तय कर दी है। होटल रेस्तरां में न्यूनतम 11 हजार और इंजीनियरिंग क्षेत्र में 13 हजार मजदूरी तय की गई है।
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तय की गई न्यूनतम मजदूरी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे मजदूरों के लिए श्रम विभाग ने मजदूरी तय कर दी है। इसकी शुरुआत सात सेक्टरों से की गई है। असंगठित क्षेत्र में 20 लाख से ज्यादा मजदूर होटल-रेस्तरां, बीड़ी, कालीन, कांच व चूड़ी, इंजीनियरिंग, चीनी और आसवानी उद्योग में हैं। इन सेक्टरों में मजदूरी का कोई मानक तय नहीं हैं। इसे देखते हुए श्रम विभाग ने इन क्षेत्रों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय की है।

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होटल और रेस्तरां में काम कर रहे मजदूरों के लिए न्यूनतम 11 से 22 हजार रुपये महीना की मजदूरी तय की गई है। चीनी उद्योग में न्यूनतम 24 हजार और आसवानी या डिस्टलरीज में न्यूनतम 20 हजार रुपये तय किए गए हैं। बीड़ी, कांच और कालीन से जुड़े उद्योगों में न्यूनतम मजदूरी 8 हजार से 10 हजार रुपये महीना तय की गई है। इस अहम फैसले का सबसे ज्यादा लाभ होटल और रेस्तरां में काम कर रहे मजदूरों को होगा। उनके पहचान के लिए श्रम विभाग सहित अन्य विभागों और संगठनों की मदद ली जाएगी।


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इन क्षेत्रों के श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी 
कुशलता होटल एवं रेस्तरां (10 से कम कर्मचारी वाले)
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होटल एवं रेस्तरां (10 से अधिक कर्मचारी वाले)    स्टार होटल (50 से 500 तक कर्मचारी वाले)    इंजीनियरिंग उद्योग (500 से ऊपर कर्मचारी वाले)    इंजीनियरिंग उद्योग      चीनी उद्योग    बीड़ी उद्योग काली उद्योग             कांच एवं चूड़ी उद्योग        
अकुशल
 
10984 11641 13042 12857 13478 24329 8877 10267 9811
अर्धकुशल
 
12108 12835 15533 14118 14826 24494 10146 11408 11180
कुशल 13561 14374 18404 15673 16174 24879
12097
 
12321
12435
 
 

श्रम एवं सेवायोजन विभाग के प्रमुख सचिव एमकेएस सुंदरम का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक वर्ग का सशक्तिकरण प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इसीलिए असंगठित क्षेत्र के कुशल व अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम दिहाड़ी तय करने का फैसला लिया गया है। इसके तहत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में न्यूनतम दिहाड़ी तय की गई है। इससे मजदूरों व उनके परिवार का जीवन स्तर बेहतर होगा।

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