एप व्यवस्था में इस तरह लग सकती है सेंध
सूत्रों का कहना है एप के जरिये दवा एवं इंप्लांट वितरण की व्यवस्था मोबाइल नंबर पर आधारित होगी। इसमें खतरा ये है कि दवा, इंप्लांट, सर्जिकल उपकरणों के नाम पर गोलमाल करने वाले फर्जी मरीज तैयार कर सकते हैं। परिवार, परिचितों के मोबाइल नंबर मरीज के तौर पर पंजीकृत कराकर व्यवस्था में सेंध लगा सकते हैं। ऐसे मामलों को कैसे रोका जाएगा, यह एप लॉन्च होने के बाद ही पता चल सकेगा।
नई व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही
में ओटीपी सत्यापन के बाद ही सामग्री निर्गत की जा सकेगी। मरीज या परिजन एप पर यूएचआईडी नंबर दर्ज कर इलाज से संबंधित पूरी जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। यह डिजिटल निगरानी प्रणाली फर्जी तरीके से दवाएं जारी करने जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाएगी।