मायावती ने कहा कि बाबा साहब के आत्मसम्मान के आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए कांशीराम ने दलित, शोषित और वंचित समाज को संगठित कर उन्हें राजनीतिक शक्ति बनाने का काम किया। लेकिन आज भी कई दल संकीर्ण राजनीति के कारण उनके विचारों को कमजोर करने में लगे हैं।उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी व अन्य कई पार्टियां बहुजन समाज के मुद्दों पर भरोसे के लायक साबित नहीं हुईं। आरक्षण जैसी संवैधानिक व्यवस्था को भी कमजोर करने की कोशिशें हुई हैं, जिससे समाज में चिंता है।
सामाजिक परिवर्तन दिवस कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी।
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बसपा संस्थापक कांशीराम की जयंती 15 मार्च को है, और इस बार सभी राजनीतिक दल उनके योगदान को याद करने में व्यस्त हैं। बसपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अलग-अलग कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है। लखनऊ में बसपा की जनसभा के अलावा अन्य प्रदेशों में भी कार्यक्रम होंगे। समाजवादी पार्टी ने जिलों में जयंती मनाने का एलान किया है। कांग्रेस ने जयंती समारोह और दलित संवाद आयोजित किया, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए।
विशेषज्ञों के अनुसार, राजनीतिक दलों की यह भागीदारी केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि दलित वोटबैंक की ताकत को ध्यान में रखकर की जा रही है। उत्तर प्रदेश में दलित आबादी लगभग 21 फीसदी है और 85 विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। अन्य सीटों पर भी दलित वोटबैंक का महत्व चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में निर्णायक है।
कांशीराम के बताए रास्ते पर चल रही है सपा
समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय महासचिव मनोज पासवान कहते हैं कि कांशीराम हमेशा दलित- पिछड़ों को सत्ता में भागीदारी देना चाहते थे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इसी मार्ग पर चल रहे हैं और जाति जनगणना के आधार पर सभी वर्गों को हिस्सेदारी देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बामसेफ कैडर के वंशीधर बौद्ध को विधानसभा भेजकर यह संदेश दिया कि वे कांशीराम के विचारों का अनुसरण कर रहे हैं।
कांग्रेस ने हमेशा रखा दलितों का साथ
लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. राजेंद्र वर्मा बताते हैं कि दलित वोटबैंक इन दिनों बसपा को लेकर संशय में है। कांग्रेस इस अवसर का उपयोग कांशीराम के नारे और विचारों को दोबारा सक्रिय कर अपने राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए कर रही है। कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव कहते हैं कि कांग्रेस हमेशा दलितों के साथ रही है और अब कांशीराम के विचारों को आम जनता तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।