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यूपी: प्रदेश में बड़े पैमाने पर आरटीओ और एआरटीओ में बदलाव, आलोक कुमार बने लखनऊ के नए एआरटीओ प्रवर्तन

Sat, 03 Jan 2026 09:13 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Change in ARTO: प्रदेशभर में तीन आरटीओ व 18 एआरटीओ को नई तैनाती दी गई है। नई तैनाती के बाबत शनिवार को विशेष सचिव खेमपाल सिंह की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। 
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यूपी में आरटीओ तबादले। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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आलोक कुमार यादव को लखनऊ के सहायक संभागीय अधिकारी (एआरटीओ, प्रवर्तन) पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही प्रदेशभर में तीन आरटीओ व 18 एआरटीओ को नई तैनाती दी गई है। नई तैनाती के बाबत शनिवार को विशेष सचिव खेमपाल सिंह की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। दरअसल, गत नवंबर में एसटीएफ ने लखनऊ, फतेहपुर, रायबरेली में ओवरलोडिंग वाहनों से वसूली के मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। 

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 इसमें लखनऊ एआरटीओ सहित तीन एआरटीओ, पीटीओ आदि का निलंबन भी हुआ। एसटीएफ की कार्रवाई के बीच वाहनों की जांच का काम बाधित हो रहा था। ऐसे में नए एआरटीओ, प्रवर्तन को तैनाती मिलने से लखनऊ में वाहनों की जांच का काम फिर से पटरी पर लौट सकेगा।

आलोक कुमार यादव के अतिरिक्त चंपा लाल को सिद्धार्थनगर, अशोक कुमार श्रीवास्तव को गाजियाबाद, कौशल कुमार सिंह को सोनभद्र, मानवेंद्र प्रताप सिंह को सहारनपुर, विनय कुमार सिंह को आगरा, कृष्ण कुमार यादव को फर्रुखाबाद का एआरटीओ प्रशासन बनाया गया है। वहीं, हरिओम को बदायूं, वैभव सोती को बरेली, सतेंद्र कुमार यादव को मथुरा, विंध्याचल कुमार गुप्ता को कानपुर, उमेश चंद्र कटियार को रायबरेली, गुलाब चंद्र को अयोध्या, विपिन कुमार को बागपत, हरिओम को शाहजहांपुर, प्रतीक मिश्र को फतेहपुर, नीतू शमां को बुलंदशहर का एआरटीओ प्रवर्तन बनाया गया है। देवदत्त कुमार को मेरठ का एआरटीओ प्राविधिक बनाया गया है।
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राघवेंद्र सिंह बने आरटीओ वाराणसी
इसी क्रम में तीन आरटीओ को नई तैनाती दी गई है। विशेष सचिव खेमपाल सिंह ने बताया कि संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ प्रशासन) राघवेंद्र सिंह को वाराणसी, मनोज कुमार सिंह को आरटीओ प्रशासन सहारनपुर व अम्बरीश कुमार को आरटीओ प्रवर्तन मेरठ बनाया गया है।

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ओवरलोडिंग वाहनों से वसूली की जांच शुरू, पूर्व अफसरों पर भी गिरेगी गाज

ओवरलोडिंग वाहनों से होने वाली वसूली के मामले में एसटीएफ की कार्रवाई के बीच परिवहन विभाग ने भी विभागीय जांच शुरू कर दी है। जांच के रडार पर सिंडिकेट से जुड़े पूर्व अफसर भी हैं। ऐसे में उन्होंने लखनऊ की दौड़ लगानी शुरू कर दी है। बचत की जुगत भी लगा रहे हैं। मंत्रियों से मिल रहे हैं तथा लखनऊ में ही डेरा डाले हुए हैं।

बता दें कि ओवरलोडिंग वाहनों से वसूली का खेल काफी पुराना है। लेकिन यह 2022 में बंद हो गया था, जिसे एक जोनल स्तर के अफसर ने दोबारा शुरू करवाया था। सिपाहियों से लेकर आला अफसर तक इस रैकेट में शामिल हैं। उप्र ऑटो लोडर संयुक्त कल्याण समिति ने भी वसूली को लेकर अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए थे। समिति ने मांग की थी कि लखनऊ और संभाग में तैनात रहे पुराने अधिकारियों के कार्यकाल की भी जांच की जाए। इस संबंध में परिवहन मंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन भी सौंपा गया था।
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