10 करोड़ परियोजना लागत वाले स्थलों में आगरा, लखनऊ, कानपुर, बरेली, बाराबंकी, वाराणसी, ललितपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, शाहजहांपुर, लखीमपुर, गाजियाबाद, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, मुरादाबाद और सहारनपुर शामिल है। पांच करोड़ की परियोजना में जिला मुख्यालय व अन्य स्थल हैं। विभाग को लागत मूल्य कम करने और नियमों में छूट देने से इस क्षेत्र में निजी निवेशकों के आने की उम्मीद है।
निजी क्षेत्र की मंडियां स्थापित होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। बाजार के लिए प्रतिस्पर्धा जरूरी होता है। इसका फायदा किसानों को मिलेगा। जहां ज्यादा लाभ व सुविधाएं मिलेंगी किसान वहां जाएंगे। निजी मंडी शुरू होने से वहां प्रसंस्करण, शीतगृह सहित अन्य सुविधाएं भी मिल सकेंगी। भविष्य के लिहाज से यह बेहतर कदम होगा।- दयाशंकर सिंह, एफपीओ संचालक
ज्यादा मुनाफा दिलाने की कोशिश
किसानों को ज्यादा मुनाफा दिलाने के प्रयास लगातार जारी हैं। सरकारी मंडियों में पहले की अपेक्षा सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। निजी क्षेत्र की मंडियां खुलने से किसानों को फायदा मिलेगा। उसे जहां ज्यादा सुविधाएं और भाव मिलेगा वह वहां अपनी उपज बेच सकेगा। जहां सरकारी मंडियां नहीं हैं वहां निजी क्षेत्र की मंडियां खुलने से किसानों को उनके घर के आसपास ही विपणन की सुविधा मिल सकेगी।- रविंद्र, प्रमुख सचिव कृषि