सपा ने टिकट देने में जातीय समीकरणों को साधने का पूरा प्रयास किया है। साथ ही इस बात का भी ख्याल रखा है कि उसके किसी कदम से धार्मिक ध्रुवीकरण का संदेश न जाए। यही वजह है कि मुस्लिम और यादवों से ज्यादा कुर्मी, मौर्य- शाक्य-सैनी-कुशवाहा प्रत्याशियों को टिकट दिए हैं।
सपा के अब तक घोषित किए गए 57 प्रत्याशियों में से चार मुस्लिम, नौ सामान्य वर्ग के, 15 एससी और 29 ओबीसी हैं। गठबंधन के तहत सपा को यूपी में 62 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने हैं, जबकि 17 सीटें कांग्रेस और एक तृणमूल कांग्रेस के खाते में है।
सपा ने टिकट देने में अपनी पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) रणनीति का ध्यान तो रखा है, पर मंशा यह भी रही है कि आधार वोट में प्लस करने वाले प्रत्याशी उतारे जाएं। इन्हीं समीकरणों के तहत नौ सीटों-बस्ती, प्रतापगढ़, गोंडा, अंबेडकरनगर, बांदा, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, कुशीनगर और श्रावस्ती में कुर्मी-पटेल-सैंथवार प्रत्याशी दिए हैं।
सिर्फ सात फीसदी मुस्लिम प्रत्याशी
मुस्लिम और यादव (माय) सपा के आधार वोट बैंक माने जाते हैं, लेकिन सिर्फ चार सीटों-कैराना, गाजीपुर, संभल और रामपुर में ही उसने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। प्रदेश की आबादी में मुस्लिम करीब 20 फीसदी हैं, लेकिन सपा के अभी तक घोषित प्रत्याशियों में इनकी हिस्सेदारी सात फीसदी ही है।