फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

UP: तपने लगी यूपी की इस हाई प्रोफाइल सीट की सियासी जमीन... मतदाताओं की चुप्पी से प्रत्याशी बने चकरघिन्नी

सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 12 May 2024 10:09 AM IST

सार

Kaiserganj Lok Sabha Election 2024: यूपी की हाई प्रोफाइल सीटों में शामिल इस सीट की सियासी जमीन तपने लगी है। मतदाताओं की चुप्पी से सभी प्रत्याशी चकरघिन्नी बने हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
UP Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
महिला पहलवानों के विवाद में बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप तय होने के बाद हाई प्रोफाइल सीटों में शामिल कैसरगंज की सियासी जमीन तपने लगी है। पहले उम्मीदवारी को लेकर चर्चित रही इस सीट पर अब जीत को लेकर नफा नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा है। 

इस पर भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह की जगह उनके बेटे करण भूषण पर दांव लगाया है। वहीं, सपा ने भी ब्राह्मण बहुल सीट पर राम भगत मिश्रा जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता को मैदान में उतार कर अपने मंसूबों को साफ कर दिया है। 


बसपा ने भी इसी जाति के वोट बैंक को साधने के लिए नरेंद्र पांडेय को मैदान में उतार कर लड़ाई को रोचक बना दिया है। ऐसे में करण भूषण के सामने पिता बृजभूषण की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है।

जातीय समीकरण के लिहाज से यहां ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। करीब साढ़े चार लाख ब्राह्मण वोटर हैं। सभी दलों की निगाहें ब्राह्मणों पर ही रहती हैं। 
 
विज्ञापन

UP Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
महिला पहलवानों के विवाद में बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप तय होने के बाद हाई प्रोफाइल सीटों में शामिल कैसरगंज की सियासी जमीन तपने लगी है। पहले उम्मीदवारी को लेकर चर्चित रही इस सीट पर अब जीत को लेकर नफा नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा है। 

इस पर भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह की जगह उनके बेटे करण भूषण पर दांव लगाया है। वहीं, सपा ने भी ब्राह्मण बहुल सीट पर राम भगत मिश्रा जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता को मैदान में उतार कर अपने मंसूबों को साफ कर दिया है। 

बसपा ने भी इसी जाति के वोट बैंक को साधने के लिए नरेंद्र पांडेय को मैदान में उतार कर लड़ाई को रोचक बना दिया है। ऐसे में करण भूषण के सामने पिता बृजभूषण की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है।

जातीय समीकरण के लिहाज से यहां ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। करीब साढ़े चार लाख ब्राह्मण वोटर हैं। सभी दलों की निगाहें ब्राह्मणों पर ही रहती हैं। 
 

नामांकन खत्म होने से एक दिन पहले प्रत्याशियों की तस्वीर साफ होने के बाद से ही सभी दल जातीय समीकरण साधने में जुटे हैं। तकरीबन सभी दलों ने प्रत्याशी अंतिम समय में घोषित किया। इसलिए सभी को प्रचार का समय कम ही मिला। ऐसे में मतदाताओं की चुप्पी से सभी प्रत्याशी चकरघिन्नी बने हुए हैं।

कहीं करण तो कहीं भगत के प्रति दिखा झुकाव
पांच विधानसभा सीटों वाले इस लोकसभा क्षेत्र में कही करण भूषण का समर्थन दिखा तो कहीं भगत राम के प्रति झुकाव नजर आया। सपा प्रत्याशी के प्रति पयागपुर और कैसरगंज में ब्राह्मण मतदाताओं के बीच सहानुभूति देखने को मिली। गोंडा जिले के तरबगंज और करनैलगंज क्षेत्र में बृजभूषण के दबदबे का असर दिख रहा है। वहीं कटरा बाजार विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण वोट बैंक में बिखराव के संकेत देखने को मिले।

मुफ्त राशन और आयुष्मान की भी हो रही चर्चा
जरवल क्षेत्र के झुकिया के रहने वाले पासी जाति के गौरीशंकर कहते हैं कि पहली बार जिस सरकार ने गरीबों की सुध ली है, भल्लर और मजदूरी करने वाले मोईन अली कहते हैं कि मुफ्त राशन एक बड़ी मदद है।

इसलिए हम तो उसी की मदद करेंगे, जो हम जैसे मजदूरों की मदद करेगा। करनैलगंज के परसपुर कस्बे के अधिवक्ता वीरेंद्र विक्रम तिवारी कहते हैं कि विकास के दावे तो बहुत हो रहे पर बेरोजगारी, पेपरलीक, छुट्टा पशु जैसे तमाम मुद्दे हैं, जिसका जवाब भाजपा से मांगा जा रहा है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next