लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में मतदाताओं ने खामोशी से धुरंधरों की किस्मत लिखी। यूपी में अधिकतर सीटों पर भाजपा और सपा की सीधी टक्कर दिखाई दी। देवीपाटन मंडल की दो संसदीय सीटों पर यहां के वोटरों का मिजाज अंतिम समय तक सियासी खिलाड़ी भी भाप नहीं सके।
देवीपाटन मंडल की दो संसदीय सीटों पर मतदाताओं के दांव से लड़ाकों की बेचैनी शाम तक बढ़ गई। गोंडा और कैसरगंज में खामोशी के साथ भाग्यविधाता ने उम्मीदवारों की किस्मत को ईवीएम में लॉक कर दिया। दोनों संसदीय सीटों पर भाजपा व सपा में सीधी टक्कर दिखी।
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यहां के वोटरों का मिजाज अंतिम समय तक सियासी खिलाड़ी भी भाप नहीं सके। यह अलग बात रही कि हर तरफ से मिल रहे रुझान से लड़ाकों का आत्मविश्वास डगमगाता दिखा। दिखावटी दावे तो जुबां पर रहे, लेकिन दिल का दर्द चेहरे पर झलकता दिखा। संसदीय सीट का चुनाव तो मंडल की दो सीटों पर था, लेकिन सभी की निगाहें कैसरगंज पर टिकी रहीं।
कैसरगंज विधानसभा में सपा का पलड़ा हमेशा की तरह भारी ही नजर आया। इस बार करनैलगंज में बड़े अंतर की उम्मीद है, कारण विधायक के साथ ही पूर्व विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भय्या का साथ भी भाजपा के करन भूषण सिंह को हासिल था। मतदान में टक्कर का अंदाज रहा। इसी तरह गोंडा संसदीय सीट में सदर विधानसभा के साथ ही मेहनौन, गौरा और उतरौला में भाजपा व सपा के बीच जंग तेज रही।
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मनकापुर विधानसभा भाजपा प्रत्याशी कीर्तिवर्धन सिंह का गढ़ है, जहां उनके साथ ही सपा की श्रेया वर्मा भी जोर लगाते दिखीं। इस तरह दोनों संसदीय सीटों पर कांटे की टक्कर नजर आई। इससे दोनों खेमों में मतों के जोड़-घटाव का दौर शुरू हो गया। पूरे इत्मिनान के साथ तो नहीं, लेकिन दोनों पार्टियां जीत का दम
भरते दिखीं।
प्रतीक भूषण व सपा के पूर्व प्रधान में मारपीट
करनैलगंज विधानसभा क्षेत्र के अहिरौरा मतदान केंद्र पर सोमवार को मतदान के दौरान भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह व सपा के पूर्व प्रधान के बीच वोट डालने को लेकर तीखी झड़प के बाद शुरू हुई हाथापाई देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। पूर्व प्रधान ने करनैलगंज कोतवाली में भाजपा विधायक, उनके गनर, जिपं सदस्य समेत चार लोगों के खिलाफ तहरीर दी है। वहीं, कैसरगंज से भाजपा प्रत्याशी करण भूषण सिंह के मतदान अभिकर्ता महेंद्र सिंह ने पूर्व प्रधान समेत तीन लोगों पर अपने सहयोगी को बंधक बनाने का आरोप लगाते हुए एसपी से शिकायत दर्ज कराई है। मामले में सपा के पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने वीडियो जारी कर भाजपा विधायक और उनके समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
कैसरगंज से भाजपा प्रत्याशी करण भूषण सिंह के मतदान अभिकर्ता महेंद्र सिंह ने एसपी से शिकायत दर्ज कराई है। इसमें कहा कि करनैलगंज के अहिरौरा में बूथों का निरीक्षण करने गए थे, जहां अहिरौरा के पूर्व प्रधान राजकुमार सिंह, उनके साथी विजय कुमार व पवन कुमार ने अभद्रता करते हुए घेर लिया और झगड़ा करने पर आमादा हो गए। उनका अभिकर्ता कार्ड छीनकर फाड़ दिया। सहयोगी सेमराशेखपुर निवासी अनिल कुमार बंधक बना लिया और जान से मारने की धमकी दी।
मतदान केंद्र के बाहर स्मृति व किशोरी शर्मा में बहस
भाजपा प्रत्याशी स्मृति इरानी व कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा में बहस ने खासा तूल पकड़ लिया। दोनों ने एक दूसरे पर आरोप लगाए। एसडीएम तिलोई आशीष सिंह का कहना है कि विवाद की सूचना मिली थी। मौके पर गए थे। दरअसल, तिलोई विधानसभा क्षेत्र के रस्तामऊ पोलिंग स्टेशन पर कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा भ्रमण कर रहे थे, तभी भाजपा उम्मीदवार स्मृति जूबिन इरानी पहुंच गईं। भाजपा उम्मीदवार को पता चला कि कांग्रेस प्रत्याशी मुस्लिम वोटरों के साथ बातचीत कर रहे हैं। इस पर उन्होंने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से इसकी शिकायत की। विरोध जताते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव चल रहा है। ऐसे में कोई प्रचार कैसे कर सकता है।
इस संबंध में उनका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। जिसमें वह कह रही हैं कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रचार कर रहे हैं। इसका उनके पास प्रमाण है। मुस्लिम लोगों को इकट्ठा क्यों किया था किशोरी लाल ने। क्या इन लोगों (हिन्दू समुदाय) का वोट नहीं चाहिए। क्या यह सेंस्टिव बूथ नहीं है। इसके बाद उनकी शिकायत पर अफसरों ने भी जांच की। इस पूरे मामले में कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल का कहना है कि वह बूथ पर भ्रमण के लिए गए थे। वहां एक न्यूज चैनल की पत्रकार बात करना चाहती थीं। उन्हें बाहर बुला कर इंटरव्यू दे रहे थे।
अयोध्या में दिखी मतदाताओं की बेरूखी नतीजे पर पड़ेगा असर
फैजाबाद लोकसभा सीट पर मतदान के बाद विधानसभा वार वोटिंग प्रतिशत घटने के मायने निकाले जा रहे हैं। वोटरों की बेरुखी से मतदान प्रतिशत गिरने की आशंका है। भाजपा का गढ़ माने जाने वाले अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में पिछले चुनाव की तुलना में इस बार नौ फीसदी कम मतदान हुआ है। फैजाबाद के विधानसभा क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत कम होने का असर चुनाव परिणाम पर भी दिख सकता है।
फैजाबाद लोकसभा सीट पर सबसे महत्वपूर्ण अयोध्या विधानसभा क्षेत्र को माना जाता है। यहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने पांच मई को रोड शो भी किया था। बावजूद इसके अयोध्या विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने मतदान में अधिक रुचि नहीं दिखाई। यहां वर्ष 2019 में 62 प्रतिशत वोट पड़े थे, जबकि 2024 के चुनाव में 53़ 91 प्रतिशत ही मतदान हुआ। रुदौली में करीब चार प्रतिशत, मिल्कीपुर में पांच प्रतिशत व बीकापुर में तीन प्रतिशत मत पिछले चुनाव की तुलना में कम
हुआ है।
पिछले दो चुनाव में बनाई थी बढ़त
फैजाबाद संसदीय सीट पर 2019 में सर्वाधिक 59.67 प्रतिशत मतदान हुआ था। सबसे कम मतदान 1957 में हुए पहले चुनाव में था। इस चुनाव में केवल 37.86 प्रतिशत मतदाताओं ने ही मताधिकार का प्रयोग किया था। मतदान प्रतिशत में वृद्धि का क्रम 2014 से शुरू हुआ था। इसका असर परिणाम पर दिखेगा।