सूरज की तपिश के बीच मतदाताओ का उत्साह चरम पर था। मैदान में तो 13 उम्मीदवार रहे पर सोमवार क मतदाताओं के मन से लेकर मतदान केंद्र पर ईवीएम का बटन दबाने तक सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच दिखाई पड़ा। या यूं कहा जाए कि 15 वर्ष बाद कमल के फूल से पंजा टकराता हुआ दिखाई दिया। दोनों के बीच खूब लड़ाई रही।
बसपा का उम्मीदवार तो था पर एजेंट से लेकर मतदान केंद्रों पर कहीं हाथी का झंडा दिखाई नहीं दिया। मतदान के दौरान भले ही स्थानीय मुद्दे गौड रहे हों किंतु दलों के शिगूफे मतदाताओं के सिर चढ़कर बोले। कर्ज माफी, खतरे में संविधान, खत्म होगा आरक्षण और हर महिला को एक लाख का वादा लोगों के मन में थे।
वहीं मोदी की रैली में राममंदिर से लेकर अन्य घोषणाओं पर मतदाता खुश तो था पर एक जाति का वोट के बिखराव को रोकने के लिए की गई कवायद सफल नहीं दिखी। 19 लाख से अधिक मतदाताओं वाले बाराबंकी सीट पर करीब साढ़े 12 लाख ने मताधिकार का प्रयोग कर रिकॉर्ड बनाया।
गठबंधन में एकजुटता तो भाजपा में दिखा कुप्रबंधन
मतदान के दौरान इंडिया गठबंधन के नेताओं में उत्साह के साथ वोट डलवाने का जोश दिखा। कर्ज माफी से लेकर संविधान बदलने और एक लाख महिलाओं को देने की बात मतदाताओं के मन में भरने में सफल रहे।