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UP: इस सीट पर लंबे समय बाद भाजपा और कांग्रेस का सीधा मुकाबला, गठबंधन में दिखी एकजुटता; BJP में दिखा कुप्रबंधन

केपी तिवारी, अमर उजाला, बाराबंकी Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 21 May 2024 01:47 PM IST

सार

यूपी की बाराबंकी सीट पर लंबे समय बाद सीधा मुकाबला देखने को मिला। 15 वर्ष बाद कमल के फूल से पंजा टकराता हुआ दिखाई दिया। दोनों के बीच खूब लड़ाई रही। 
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UP Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
सूरज की तपिश के बीच मतदाताओ का उत्साह चरम पर था। मैदान में तो 13 उम्मीदवार रहे पर सोमवार क मतदाताओं के मन से लेकर मतदान केंद्र पर ईवीएम का बटन दबाने तक सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच दिखाई पड़ा। या यूं कहा जाए कि 15 वर्ष बाद कमल के फूल से पंजा टकराता हुआ दिखाई दिया। दोनों के बीच खूब लड़ाई रही। 

बसपा का उम्मीदवार तो था पर एजेंट से लेकर मतदान केंद्रों पर कहीं हाथी का झंडा दिखाई नहीं दिया। मतदान के दौरान भले ही स्थानीय मुद्दे गौड रहे हों किंतु दलों के शिगूफे मतदाताओं के सिर चढ़कर बोले। कर्ज माफी, खतरे में संविधान, खत्म होगा आरक्षण और हर महिला को एक लाख का वादा लोगों के मन में थे। 


वहीं मोदी की रैली में राममंदिर से लेकर अन्य घोषणाओं पर मतदाता खुश तो था पर एक जाति का वोट के बिखराव को रोकने के लिए की गई कवायद सफल नहीं दिखी। 19 लाख से अधिक मतदाताओं वाले बाराबंकी सीट पर करीब साढ़े 12 लाख ने मताधिकार का प्रयोग कर रिकॉर्ड बनाया। 

गठबंधन में एकजुटता तो भाजपा में दिखा कुप्रबंधन
मतदान के दौरान इंडिया गठबंधन के नेताओं में उत्साह के साथ वोट डलवाने का जोश दिखा। कर्ज माफी से लेकर संविधान बदलने और एक लाख महिलाओं को देने की बात मतदाताओं के मन में भरने में सफल रहे। 
 
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UP Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
सूरज की तपिश के बीच मतदाताओ का उत्साह चरम पर था। मैदान में तो 13 उम्मीदवार रहे पर सोमवार क मतदाताओं के मन से लेकर मतदान केंद्र पर ईवीएम का बटन दबाने तक सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच दिखाई पड़ा। या यूं कहा जाए कि 15 वर्ष बाद कमल के फूल से पंजा टकराता हुआ दिखाई दिया। दोनों के बीच खूब लड़ाई रही। 

बसपा का उम्मीदवार तो था पर एजेंट से लेकर मतदान केंद्रों पर कहीं हाथी का झंडा दिखाई नहीं दिया। मतदान के दौरान भले ही स्थानीय मुद्दे गौड रहे हों किंतु दलों के शिगूफे मतदाताओं के सिर चढ़कर बोले। कर्ज माफी, खतरे में संविधान, खत्म होगा आरक्षण और हर महिला को एक लाख का वादा लोगों के मन में थे। 

वहीं मोदी की रैली में राममंदिर से लेकर अन्य घोषणाओं पर मतदाता खुश तो था पर एक जाति का वोट के बिखराव को रोकने के लिए की गई कवायद सफल नहीं दिखी। 19 लाख से अधिक मतदाताओं वाले बाराबंकी सीट पर करीब साढ़े 12 लाख ने मताधिकार का प्रयोग कर रिकॉर्ड बनाया। 

गठबंधन में एकजुटता तो भाजपा में दिखा कुप्रबंधन
मतदान के दौरान इंडिया गठबंधन के नेताओं में उत्साह के साथ वोट डलवाने का जोश दिखा। कर्ज माफी से लेकर संविधान बदलने और एक लाख महिलाओं को देने की बात मतदाताओं के मन में भरने में सफल रहे। 
 

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन से लेकर जिला प्रभारी तक जिस बूथ प्रबंधन और पन्ना प्रमुखों को जो जिम्मेदारी सौंपी थी उनमें खामियां नजर आईं। न तो बूथ अध्यक्षों को सही जानकारी थी और न ही पन्ना प्रमुख अपनी जिम्मेदारी निभाते दिखे। कुछ जगह आंतरिक गुटबाजी भी नजर आई। 

 

इन समीकरणों पर होती रही चर्चा
पोलिंग बूथ हो मतदान केंद्र से लेकर पार्टी कार्यालय तक जीत-हार के समीकरणों पर चर्चा हो रही थी। प्रधानमंत्री मोदी की रैली के बाद कुर्मी वोटों में बिखराव कम भले हुआ पर रुका नहीं। 
 

मुस्लिमों में उत्साह के साथ प्रतिक्रिया में हिंदू वोटों को डलवाने की होड में जो समीकरण बने उसका परिणाम क्या होगा यह तो चार जून को पता चलेगा, पर इतना जरूर है कि मत प्रतिशत बढ़ाने में यह भी अहम कारक रहा। मतदान की यह प्रतिद्वंद्विता अच्छी रही। 
 
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